उत्तरप्रदेश में दूर-दराज के गांवों की लड़कियां नया अध्याय लिख रही हैं। उप्र मदरसा शिक्षा परिषद (यूपीएमएसपी) की ओर से इस साल आयोजित परीक्षा में छात्राओं ने पहली बार लड़कों से बाजी मारी है। छात्राओं के उत्तीर्ण होने का प्रतिशत 90 फीसदी के आसपास रहा। वहीं लड़कों का 86 फीसदी। फस्र्ट डिवीजन आने के मामले में भी लड़कियां आगे रहीं। फस्र्ट डिवीजन आए विद्यार्थियों में 56 प्रतिशत छात्राएं रहीं।
यूपीएमएसपी के रजिस्ट्रार जावेद असलम ने परिणामों पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘हमने एक अहम मील का पत्थर पार कर लिया है।’ उन्होंने बताया कि परीक्षा में बैठने वाली लड़कियों की संख्या भी बढ़ी है। पिछले साल यह संख्या 28 हजार थी। लेकिन 2009-10 सत्र में छात्राओं की संख्या 35 हजार हो गई।
मदरसा बोर्ड परीक्षाओं (कक्षा 10 से पीजी तक) में 1,34,961 विद्यार्थी शामिल हुए जिनमें से 1,00,031 उत्तीर्ण हुए। इस साल छात्राओं के अच्छे प्रदर्शन के अलावा हाल में लिए गए एक निर्णय से मदरसा शिक्षा का चेहरा बदलने की उम्मीद है। नए सत्र से हिंदी, अंग्रेजी और कंप्यूटर को अनिवार्य विषय बनाया गया है। अभी तक केवल उर्दू अनिवार्य विषय था।
यूपीएमएसपी की परीक्षाएं
मुंशी / मौलवी - कक्षा 10वीं के बराबर
आलिम - कक्षा 12वीं या इंटरमीडिएट
कामिल - ग्रेजुएशन
फाजिल - पीजी
(मदरसों में नौकरी के लिए कामिल और फाजिल को बीए व एमए के बराबर माना जाता है। पर सरकार दाखिले या नौकरी के लिए इन्हें नियमित ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट के समतुल्य नहीं मानती है।)
(दीपक गिडवानी,दैनिक भास्कर,लखनऊ,19.7.2010)
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