मुसलिमों की शिक्षा के मुख्य केंद्र अब भी मदरसे ही हैं। मगर विडंबना है कि इनमें अंगे्रजों के वक्त शुरू हुआ विसंगतिपूर्ण पाठ्यक्रम अब भी लागू था। काफी जद्दोजहद के बाद अब जाकर उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने एक जुलाई से नया पाठ्यक्रम लागू करने का फरमान जारी किया है। २९ जून को जारी निर्देश सभी जिला मदरसा शिक्षा अधिकारियों को भेज दिया गया है। एक जुलाई से मदरसों में ब्रिटिश शासन काल से लागू पाठ्यक्रम से मुक्ति मिल जाएगी। साथ ही नया कोर्स लागू हो जाएगा।
टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया के प्रदेश महासचिव वहीदुल्लाह खां सईदी इस फैसले से खुश हैं। लेकिन, उनका कहना है कि नए पाठ्यक्रम के तहत जब तक मदरसों में शिक्षकों और अन्य व्यवस्थाएं नहीं पूरी होतीं तब तक सरकार का मकसद पूरा नहीं होगा। दरअसल २००१ में हमदर्द यूनिवर्सिटी के तत्कालीन चांसलर सैयद हामिद हुसैन ने मदरसों का पाठ्यक्रम बदलने की पहल की थी। तब नया कोर्स बनाने के लिए पांच सदस्यों की कमेटी गठित की गई। इसमें बनारस के मदरसा रहमानिया के शिक्षक मौलाना अबुल कासिम को भी शामिल कि या गया था।
उस समय पाठ्यक्रम तैयार तो हो गया मगर शासन ने लागू नहीं किया। वर्ष २००९ में जौनपुर के एक मदरसा शिक्षक ने नया पाठ्यक्रम लागू करने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली। इस पर अदालत ने नया पाठ्यक्रम लागू करने का आदेश सरकार को दिया। हालांकि, २००१ के पाठ्यक्रम में भी कुछ विसंगतियां थीं। मदरसा शिक्षा परिषद के पूर्व चेयरमैन हाजी रिजवानुल हक ने परिषद से आंशिक संशोधन पारित कराते हुए उसे शासन को भेजा। इस पर विचार विमर्श करने के बाद १६ जून को नए पाठ्यक्रम को हरी झंडी दे दी गई(अमर उजाला,वाराणसी,1.7.2010)।
टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया के प्रदेश महासचिव वहीदुल्लाह खां सईदी इस फैसले से खुश हैं। लेकिन, उनका कहना है कि नए पाठ्यक्रम के तहत जब तक मदरसों में शिक्षकों और अन्य व्यवस्थाएं नहीं पूरी होतीं तब तक सरकार का मकसद पूरा नहीं होगा। दरअसल २००१ में हमदर्द यूनिवर्सिटी के तत्कालीन चांसलर सैयद हामिद हुसैन ने मदरसों का पाठ्यक्रम बदलने की पहल की थी। तब नया कोर्स बनाने के लिए पांच सदस्यों की कमेटी गठित की गई। इसमें बनारस के मदरसा रहमानिया के शिक्षक मौलाना अबुल कासिम को भी शामिल कि या गया था।
उस समय पाठ्यक्रम तैयार तो हो गया मगर शासन ने लागू नहीं किया। वर्ष २००९ में जौनपुर के एक मदरसा शिक्षक ने नया पाठ्यक्रम लागू करने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली। इस पर अदालत ने नया पाठ्यक्रम लागू करने का आदेश सरकार को दिया। हालांकि, २००१ के पाठ्यक्रम में भी कुछ विसंगतियां थीं। मदरसा शिक्षा परिषद के पूर्व चेयरमैन हाजी रिजवानुल हक ने परिषद से आंशिक संशोधन पारित कराते हुए उसे शासन को भेजा। इस पर विचार विमर्श करने के बाद १६ जून को नए पाठ्यक्रम को हरी झंडी दे दी गई(अमर उजाला,वाराणसी,1.7.2010)।
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