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02 अगस्त 2010

मध्यप्रदेशः15 आयुर्वेदिक कॉलेजों की मान्यता ख़तरे में

सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम) ने प्रदेश के पांच सरकारी और दस निजी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज को मान्यता देने से इनकार कर दिया है, जबकि दो सरकारी और एक निजी कॉलेज को शैक्षणिक सत्र 2010-11 की मान्यता दी गई है। प्रदेश में कुल 7 सरकारी और 11 निजी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज हैं।

सरकारी और निजी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में प्राध्यापकों, सहायक प्राध्यापकों के रिक्त पद नहीं भरने के कारण मान्यता समाप्त की गई है। इसके चलते 685 सीटों पर प्रवेश नहीं हो सकेगा। सीसीआईएम ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों का निरीक्षण जून माह में किया था। इस दौरान इन कॉलेजों में खामियां पाई गई थीं।

खाली पड़े हैं व्याख्याताओं के 46 पद

ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, रीवा और बुरहानपुर के सरकारी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में व्याख्याताओं के 46 पद रिक्त हैं। जिन्हें भरने के लिए संचानलालय भारतीय चिकित्सा पद्धति एवं होम्योपैथी ने कई बार प्रयास किए,लेकिन पद नहीं भरे जा सके हैं।

दोबारा होगा जीरो इयर

सरकारी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों को शैक्षणिक सत्र 2010-11 की मान्यता न मिलने से इन कॉलेजों को जीरो इयर हो गया है। यह दूसरा मौका है जब सीसीआईएम ने शैक्षणिक स्टाफ की कमी के कारण इन कॉलेजों की मान्यता समाप्त की है।

भोपाल और जबलपुर के सरकारी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के अलावा रानी दुल्लैया निजी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज को सीसीआईएम ने इस सत्र की मान्यता दी है। इसके अलावा प्रदेश के किसी भी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज को शैक्षणिक सत्र 2010-11 की मान्यता नहीं दी है।

मधु हांडा,आयुक्त,भारतीय चिकित्सा पद्धति एवं होम्योपैथी,मप्र(दैनिक भास्कर,भोपाल,2.8.2010)

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