राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की ओर से नेशनल नॉलेज सर्किट तैयार किया जा रहा है। यह एक तरह से इन्फॉर्मेशन हाई-वे है। इसमें देश के करीब 1500 सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को आपस में जोडा जा रहा है। सूची में जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय भी शामिल है। यह बात अलग है कि अभी यहां काम शुरू होने में देर है। फिलहाल सर्किट के प्रथम चरण के तहत यहां नवस्थापित आईआईटी में वर्चुअल क्लासरूम तैयार करने का काम शुरू हो चुका है।
अब तक देश की आठ आईआईटी को आपस में जोडा जा चुका है। कई चरणों में पूरे होने वाले दस साल के इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 5,990 करोड आंकी गई है। फिलहाल 80 लाख रूपए खर्च किए जा चुके हैं। यह प्रोजेक्ट नेशनल इन्र्फोमेटिक सेंटर को मिला है।
राजस्थान में स्टेट इन्फॉर्मेटिक ऑफिसर इंदू गुप्ता के नेतृत्व में इस पर काम चल रहा है। इस सर्किट से जुडने के बाद यहां की यूनिवर्सिटी की कक्षा में बैठे विद्यार्थी दूसरी यूनिवर्सिटी में बैठे व्याख्याता से पढ सकेंगे।
गीगा बाइट्स की कनेक्टिविटी
अब तक किसी भी इंस्टीट्यूट्स के आपस में कनेक्ट होने पर उनकी कनेक्टिविटी 2 मेगा बाइट्स की होती थी, लेकिन इस प्रोजेक्ट में यह कनेक्टिविटी वन गीगा बाइट्स की रहेगी। यह मेगा बाइट्स से सौ गुना ज्यादा है।
विदेशों से भी जुडेंगे
यूरोपीय देशों से आने वाली रिसर्च की लाइन को भी अब सीधा इस इन्फॉर्मेशन हाई-वे से जोडा जाएगा। इसी तरह टीआईएन भी पहले एजुकेशन एंड रिसर्च नेटवर्क से जुडा था, लेकिन अब इसे इन्फॉर्मेशन हाईवे से जोडा जाएगा।
फेल नहीं होगा लिंक
राजस्थान से मुम्बई, दिल्ली और हैदराबाद के तीन कनेक्शन रहेंगे। इसी तरह तीन लिंक में से यदि कोई एक फेल भी हो जाता है तो दूसरा लिंक चालू रहेगा। इससे लास्ट कनेक्टिविटी पर असर नहीं पडेगा।
गोपनीयता बनी रहेगी
इसमें आईआईएम, आईआईटी के साथ ही इंदिरा गांधी सेंटर ऑफ एटॉमिक रिसर्च, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, रिसर्च ऑफ प्लाज्मा इंस्टीट्यूट आदि को भी इस सर्किट से जोडा जाएगा, ताकि रिसर्च में एक-दूसरे से जानकारी का लाभ ले सकें, लेकिन गोपनीयता बनाए रखने के लिए दूसरे विश्वविद्यालयों से इनका लिंक नहीं रहेगा। इस सर्किट का सबसे ज्यादा फायदा रिर्सच स्कॉलर्स को होगा।
चल रहा है काम
पहले चरण में ज्यादातर आईआईटी को जोडा जा रहा है। जोधपुर में नवस्थापित आईआईटी को कनेक्ट करने पर काम चल रहा है। फिलहाल वहां वर्चुअल क्लासरूम तैयार किया जा रहा है।
नरेश गुप्ता, टेक्निकल डायरेक्टर, एनआईसी(राजस्थान पत्रिका,जोधपुर,3.8.2010)
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