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03 अगस्त 2010

अगले वर्ष से एमबीबीएस में दाखिले के लिए एकल प्रवेश परीक्षा

सरकार अगले शिक्षा सत्र से देश में मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए एकल प्रवेश परीक्षा का आयोजन करने जा रही है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने पिछले महीने ही मंत्रालय को इसका प्रस्ताव दिया था और समझा जाता है कि मंत्रालय ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा शुरू करने पर सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त कर दी है। फिलहाल देश में 17 पीएमटी का आयोजन होता है जिससे लगभग 35 हज़ार सीटें भरी जाती हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद केवल एकल परीक्षा व्यवस्था रह जाएगी। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार,संयुक्त प्रवेश परीक्षा से देश भर की परीक्षा का स्तर समान हो जाएगा। अधिकारी ने कहा'"इस बारे में कई प्रकार की शिकायतें मिलती रही हैं कि सीटें भरने के लिए मेडिकल कॉलेज तमाम तरह की धांधलियां कर रहे हैं। इसलिए, एकरूपता तथा समान स्तर के लिए ऐसी प्रवेश परीक्षा का शुरू किया जाना ज़रूरी है।"मौजूदा व्यवस्था यह है कि हर राज्य मेडिकल पाठ्यक्रमो में प्रवेश के लिए हर राज्य में अपने-अपने क़ानून हैं। मसलन,गुजरात में एमबीबीएस में छात्रों का दाखिला इंटरमीडिएट में प्राप्त अंक के आधार पर किया जाता है। अनुमान है कि इस परीक्षा का आयोजन सीबीएसई करेगी जो सरकारी कॉलेजों में कई एमबीबीएस सीटों के लिए अखिल भारतीय पीएमटी का आयोजन करती रही है।
इस परीक्षा में प्राप्त अंक के आधार पर ही सभी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिलेगा। देश में इस समय लगभग 300 मेडिकल कॉलेज हैं जिनमें से 120 मेडिकल कॉलेज अपनी परीक्षाएं आयोजित करते हैं। अन्य में,पीएमटी में प्राप्तांक के आधार पर दाखिला मिलता है। पीएमटी का आयोजन राज्य बोर्डों,सीबीएसई और सशस्त्र बलों द्वारा किया जाता है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य डाक्टर देवी शेट्टी ने कहा "एकल परीक्षा से छात्रों पर मानसिक दबाव कम होगा। सभी छात्रों के लिए सभी पीएमटी में शामिल हो पाना संभव नहीं होता। साथ ही,एक ही दिन दो कॉलेजों की परीक्षाएं होने से भी छात्र उलझन में रहते हैं। एकल परीक्षा व्यवस्था से ये परेशानियां दूर हो जाएंगी।"(टीना ठाकर,इंडियन एक्सप्रेस,मुंबई,3.8.2010)

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