राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने विश्वविद्यालय शिक्षकों को 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त नहीं करने के एकलपीठ के अंतरिम आदेश को निरस्त कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश जगदीश भल्ला व न्यायाधीश दिनेश माहेश्वरी की खंडपीठ ने यह आदेश महाराणा प्रताप कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय, उदयपुर की ओर से दायर विशेष अपील की सुनवाई के बाद दिए।
एकलपीठ ने डॉ. टीएस रावत, एलएन शर्मा व अन्य को 31 जुलाई को 60 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त नहीं करने के अंतरिम आदेश दिए थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसके खिलाफ विशेष अपील दायर की थी। विश्वविद्यालय की ओर से पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता जीआर पूनिया ने कहा कि विश्वविद्यालय के सेवा नियमों में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से संबंधित संशोधन नहीं किया गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा विवि शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ा कर 65 वर्ष करने की अनुशंसा को राज्य सरकार ने लागू नहीं किया है। अत: नियमों में संशोधन के बिना सेवानिवृत्ति की आयु को 65 वर्ष नहीं किया जा सकता।
शिक्षकों की ओर से केविएट पेश कर कहा गया कि एकलपीठ ने विस्तृत सुनवाई कर यह अंतरिम आदेश जारी किए थे। इस मामले की सुनवाई 16 अगस्त को रखी गई है। इसलिए अंतरिम आदेश को विशेष अपील के जरिए चुनौती देना न्यायोचित नहीं है(दैनिक भास्कर,जोधपुर,3.8.2010)।
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