इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) कक्षाओं में दाखिले के लिए हुई संयुक्त प्रवेश परीक्षा (सीईटी) के नतीजे काफी खराब आए हैं। सीईटी में 450 छात्र शामिल हुए, लेकिन रिजल्ट आए तो केवल 41 ही पास हो सके। यानी अपने ही विवि की परीक्षा में छात्र असफल हो गए।
इस लेकर छात्रों ने विवि पर परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सोमवार को जमकर हंगामा मचाया। छात्रों का आरोप है कि बाहरी छात्रों को प्रवेश देने के लिए विवि ने परीक्षा के नियम जानबूझकर कड़े कर दिए हैं। छात्रों के हंगामें के कारण विवि प्रशासन को काउंसिलिंग तक रोकनी पड़ गई। सोमवार को पीजी कक्षाओं के लिए लभांडी स्थित कृषि महाविद्यालय में काउंसिलिंग आयोजित गई थी। विवि ने पीजी कक्षाओं में प्रवेश के लिए 28 जुलाई को सीईटी ली थी। इसमें लगभग 450 छात्र-छात्राओं शामिल हुए।
सोमवार को जब इसके नतीजे घोषित किए गए तो छात्रों के पैरों तले जमीन खिसक गई। काउंसिलिंग के पहले जारी की गई सूची में केवल 41 छात्र-छात्राओं के नाम थे। विवि में पीजी कक्षाओं की तकरीबन 120 सीटें हैं। परीक्षा के नतीजे देखकर छात्र आक्रोशित हो गए। उन्होंने सुबह 10.30 बजे परीक्षा प्रभारी डा. यूके ंिमश्रा और कालेज के डीन डा. ओपी कश्यप से मिलकर इसकी जानकारी मांगी। उन्होंने बताया कि जिन छात्रों ने 50 प्रतिशत से अधिक अंक पाए हैं, उन्हें ही प्रवेश दिया जाएगा।
इस पर छात्र गुस्सा गए। उन्होंने कहा कि प्री एग्रीकल्टर टेस्ट में न्यूनतम अंक की कोई बाध्यता नहीं रहती। छात्रों के प्राप्तांक के आधार पर मेरिट लिस्ट बनाई जाती है। इसी के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। उन्होंने कहा िक रातों रात इस तरह के मापदंड क्यों बना दिए गए हैं, जिससे कालेज में पढ़ने के लिए छात्र ही नहीं मिलें? अधिकारियों से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने से छात्र आक्रोशित हो गए। उन्होंने नारेबाजी करते हुए हंगामा मचा दिया। छात्रों का कहना है कि विवि ने जानबूझकर प्रश्न-पत्र इस तरह सेट किया, जिससे स्थानीय छात्र बाहर हो जाएं।
आखिर विवि से पढ़कर निकले छात्र यहीं की परीक्षा कैसे पास नहीं कर पाएंगे? शोर-शराबा इतना अधिक बढ़ गया कि डेढ़ बजे काउंसिलिंग बंद करनी पड़ गई। विवि के परीक्षा अधिकारी श्री मिश्रा और डीन श्री कश्यप कुलपति से मार्गदर्शन लेने प्रशासनिक भवन आ गए।
इससे छात्रों का गुस्सा बढ़ गया। उन्होंने कुलपति के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति को नियंत्रित करने अधिकारियों ने पुलिस को सूचना दे दी। शाम 4.30 बजे अफसर दोबारा लौटे और काउंसिलिंग फिर से शुरू कर दी। 41 छात्रों को प्रवेश देने के बाद काउंसिलिंग बंद कर दी गई। गौरतलब है कि विवि ने सीईटी के लिए 16 जुलाई को परीक्षा आयोजित की थी। इसमें कई छात्रों के नाम सूची से गायब कर दिए गए थे। छात्रों के हंगामे के बाद परीक्षा स्थगित करनी पड़ी थी।
कमेटी करेगी विचार - कुलपति
विवि के कुलपति डा. एमपी पांडेय ने भास्कर को बताया कि प्रवेश परीक्षा के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक पाना अनिवार्य है। इससे कम अंक पाने वालों को पीजी कक्षाओं में प्रवेश नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि पीजी की सीटें नहीं भरने पर मापदंड शिथिल करने के लिए मंगलवार को अधिकारियों की बैठक ली जाएगी।
इसमें सीईटी के साथ ग्रेजुएशन के प्रतिशत के आधार पर प्रवेश के नए मापदंड तय किए जाएंगे। बैठक के बाद ही छूटे छात्रों को प्रवेश देने पर फैसला लिया जाएगा। उनसे यह पूछने पर कि आखिर छात्र अपनी ही विवि की प्रवेश परीक्षा पास नहीं कर पा रहे हैं, वे राष्ट्रीय स्तर पर कैसे प्रतिस्पर्धा करेंगे? कुलपति ने कहा कि यह गहन विचार-विमर्श की बात है। विवि की पढ़ाई की गुणवत्ता पर बाद में विचार किया जाएगा(दैनिक भास्कर,रायपुर,3.8.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।