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22 अगस्त 2010

डीयू स्टूडेंट्स जूझ रहे हैं मकान की परेशानी से

डीयू के नॉर्थ कैंपस के आसपास रहने वाले स्टूडेंट्स और कामकाजी लोगों को कॉमनवेल्थ गेम्स की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। डीयू के हॉस्टल स्टूडेंट्स से खाली करा लिए गए हैं, ऐसे में रेंट पर रूम चाहने वाले स्टूडेंट्स की तादाद कई गुना बढ़ गई है। अब इलाके के प्रॉपर्टी डीलर इस मौके का जमकर फायदा उठा रहे हैं। हडसन लेन, विजय नगर, हकीकत नगर, मॉरिस नगर, मॉल रोड, किंग्स्वे कैंप, मुखर्जी नगर जैसे इलाकों में सिंगल रूम और फ्लैट्स की कीमत लगभग दोगुनी हो गई है। इस मनमानी के खिलाफ डीयू स्टूडेंट्स को भी मजबूरन विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

रामजस कॉलेज में बीए सेकंड ईयर के स्टूडेंट अभिषेक बताते हैं कि पिछले साल अगस्त में हडसन लेन, हकीकत नगर और विजय नगर जैसे इलाकों में सिंगल रूम फ्लैट 4,000 से 5,000 रुपये में मिल जाते थे। इसमें दो लोग आसानी से रह सकते हैं, लेकिन गेम्स की वजह से डीयू के हॉस्टल खाली कराए जाने की खबर मिलते ही यहां अचानक रेट बढ़ने लगे। अब यही फ्लैट 8,000-9,000 रुपये में मिल रहे हैं, बिजली-पानी का खर्च अलग है।

हकीकत नगर इलाके में किराये पर रहीं प्रिया एक प्राइवेट कंपनी में काम करती हैं उनका कहना है कि मैं पहले विजय नगर में बतौर पेइंग गेस्ट एक थ्री सीट रूम में रहती थी और 2,500 रुपये दिया करती थी, पर एक दिन मकान मालिक कहा कि अगले महीने से 3,500 रुपये किराया देना होगा। मैंने विरोध किया, तो मकान मालिक ने रूम खाली करने को कह दिया। मैंने गुस्से में रूम खाली कर दिया और आसपास कई रूम सर्च किए, लेकिन हर जगह पीजी महंगे हो गए हैं। अब फ्रेंड के साथ एक फ्लैट में रह रही हूं, पर 10,000 रुपये देने पड़ रहे हैं। यही नहीं, पहले तो कई बार प्रॉपर्टी डीलर के पास जाए बिना भी फ्लैट मिल जाया करते थे, लेकिन अब तो मकान मालिक खुद ही प्रॉपर्टी डीलर बनकर दोगुना मुनाफा कमा रहे हैं। चूंकि मेरे कई फ्रेंड्स यहीं हैं और गर्ल्स के लिए यह इलाका सेफ है, इसलिए मैं यह जगह छोड़ना नहीं चाहती।

इन इलाकों के प्रॉपटीर् डीलर भी रेट बढ़ने की बात स्वीकारते हैं। एक प्रॉपर्टी डीलर ने बताया कि सिंगल रूम फ्लैट का किराया 2,000-3,000 रुपये तक बढ़ गया है जबकि डबल रूम फ्लैट का किराया 13,000-14,000 रुपये तक पहुंच गया है।

अब स्टूडेंट्स ने विरोध शुरू कर दिया है। किरोड़ीमल कॉलेज के कुछ स्टूडेंट्स पिछले गुरुवार से आर्ट्स फैकल्टी के सामने भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके साथ बैठी केएमसी की टीचर आम्रपाली ने बताया कि डीयू के हॉस्टलों में स्टूडेंट्स को सालभर के 20,000-25,000 रुपये देने पड़ते हैं, जबकि रेंट पर रूम लेने पर महीने के किराये के अलावा, प्रॉपटीर् डीलर और सिक्युरिटी मनी देने पर इतने पैसे तो एक बार में ही खर्च हो जाते हैं। दूसरी बात यह है कि स्टूडेंट्स को अक्टूबर में गेम्स के बाद हॉस्टल वापस करने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक कई कॉलेजों में रेनोवेशन वर्क ही शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में इस बात की संभावना नहीं है कि समय पर रूम वापस मिलें। आम्रपाली का कहना है कि हम दिल्ली सरकार से मांग कर रहे हैं कि 1958 में बने रेंट रेग्युलेशन एक्ट को दिल्ली में सख्ती से लागू किया जाए। इसके तहत कोई भी मकान मालिक तीन साल से पहले अपने घर का किराया नहीं बढ़ा सकता। इससे प्रॉपर्टी डीलरों की मनमानी पर लगाम लगाई जा सकती है(रीतेश पुरोहित,नभाटा,दिल्ली,22.8.2010)।

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