कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करनेवाला हर पांचवां कर्मचारी अपनी नौकरी के दौरान वर्कप्लेस पर कभी-न-कभी यौन प्रताड़ना की दौर से गुजरता है। ईटी-सिनोवेट सर्वे के जरिए यह खुलासा हुआ है। इस मामले में आईटी सेक्टर के हब बेंगलुरु में स्थिति चिंताजनक है, वहां पर लगभग 50 फीसदी कर्मचारियों का कहना है कि अपनी नौकरी के दौरान वह किसी न किसी यौन प्रताड़ना से गुजरते हैं। जबकि चेन्नै इस मामले अन्य जगहों से सेफ हैं और वहां के सिर्फ 3 फीसदी कर्मचारियों को ही इस बुरे अनुभव से दो चार होना पड़ता है।
ईटी-सिनोवेट का यह सर्वे चौंकानेवाला है। यह सर्वे एंप्लॉयी फ्रेंडली होने का दावा करनेवाली कंपनियों की पोल खोलती है। यह सर्वे बताता है कि कर्मचारियों को अपने वर्कप्लेस पर कितने बुरे अनुभव से गुजरना पड़ता है। इस सर्वे में देश के अलग शहरों के 527 कर्माचारियों से यह सवाल पूछा गया कि क्या आपको अपने ऑफिस में यौन प्रताड़ना के दौर से गुजरना पड़ा है? इस पर कर्मचारियों का जवाब वाकई चौंकानेवाला था। लगभग 20 फीसदी कर्मचारियों ने इस बात को स्वीकार किया कि उन्हें ऑफिस में कभी-न-कभी सेक्शुअल हरैस्मेंट का शिकार होना पड़ा है। हैरतवाली बात यह है कि लगभग 38 फीसदी कर्मचारियों ने कहा कि वर्कप्लेस पर लड़कियों की तरह लड़कों को भी यौन प्रताड़ना के तकलीफदेह दौर से गुजरना पड़ता है।
अगर दिल्ली की बात करें तो यहां के यहां के 31 फीसदी कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें वर्कप्लेस पर यौन प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा है। इस मामले में मुंबई की स्थिति दिल्ली से काफी बेहतर है। यहां पर सिर्फ 5 फीसदी कर्मचारियों को ऐसे अनुभव से दो चार होना पड़ता है। कोलकाता में 11 फीसदी, पुणे में 5 फीसदी और हैदराबाद में 28 फीसदी कर्मचारियों को इस बुरे अनुभव से गुजरना पड़ता है(रश्मि आर. दासगुप्ता व रवि तेजा शर्मा,नभाटा,दिल्ली,22.8.2010)।
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