मुख्य समाचारः

सम्पर्कःeduployment@gmail.com

10 अगस्त 2010

इलाहाबाद विश्वविद्यालयःअतिथि प्रवक्ताओं के चयन में फिर पेंच

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में चल रही अतिथि प्रवक्ताओं की चयन प्रक्रिया में फिर नया पेच आ गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी की गई गाइडलाइन की हिन्दी और अंग्रेजी में अलग-अलग व्याख्या की जा रही है। वेबसाइट पर उपलब्ध भारत सरकार के राजपत्र में भी यह अंतर देखा जा सकता है। इविवि के विभिन्न विभागों में नये सत्र में पठन-पाठन सुचारु रूप से चलाने के लिए अतिथि प्रवक्ताओं के चयन की प्रक्रिया चल रही है। इनके चयन के लिए निर्धारित किये गए मानदंड पर संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऐसा जारी निर्देशों की भाषा के स्पष्ट न होने के कारण हो रहा है। अंग्रेजी और हिन्दी संस्करणों को अलग-अलग ढंग से समझा जा रहा है, भले ही दोनों का आशय एक हो। विश्वविद्यालय के शिक्षक भी इस मामले पर एक राय नहीं हो पा रहे हैं। जिन विभागों में नियुक्तियां हो चुकी हैं वे भी नियुक्तियों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इसके इतर जहां नियुक्तियां अभी शेष हैं वहां नये मानक के अनुरूप अभ्यर्थियों का भी टोटा है, इतना ही नहीं तमाम दावेदार छटनी के शिकार हो रहे हैं। कुछ अतिथि प्रवक्ता ऐसे भी हैं जो पूर्व में शिक्षण कार्य कर चुके हैं लेकिन अब वे अपात्र घोषित किये जा रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है कि सत्र 2009 के पूर्व पीएचडी की डिग्री हासिल करने वालों के लिए भी नेट परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। गौरतलब है कि विवि की कार्य परिषद की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा की गई। यूजीसी के उपाध्यक्ष वेद प्रकाश जो कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में मौजूद थे, ने कहा कि 2009 के बाद की ही पीएचडी मानी जाएगी। पूर्व में जो लोग पीएचडी कर चुके हैं उन्हें नेट से छूट नहीं दी जा सकती है। इस वक्तव्य के बाद विज्ञान संकाय से संबंधित विभिन्न विभागों में की गई नियुक्तियों पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि अंतिम निर्णय अभी तक नहीं लिया गया है।(दैनिक जागरण,इलाहाबाद,10.8.2010)।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।