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10 अगस्त 2010

हिमाचलःबस्ते के बोझ से बढ़ रही बीमारियां

असंतुलित बैठना और भारी स्कूल बैग बच्चों को पोस्चरल बैक एक बीमारी की चपेट में धकेल रहे हैं। यही नहीं 60 पार बुजुर्गो को कैल्शियम की कमी के कारण ओस्टोफोरेसिस बीमारी हो रही है। ऐसे में फिजियोथ्रेपिस्ट से लाभ लेने वालों के आंकड़े दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं।

खान-पान भी धकेल रहा : हड्डियों का कमजोर होना, आधुनिक फास्ट फूड, खानपान के कारण स्वाइकल स्पोडीलोसिस (गर्दन और कमर), स्लीप डिस्ट प्रॉबलम ने भी काफी लोगों की दिक्कतें बढ़ा दी हैं। रीजनल अस्पताल हमीरपुर के फिजियोथ्रेपिस्ट अनिल राणा का कहना है कि उक्त बीमारियों के लिए फीजियोथेरेपी विभाग मंे उपकरणों से इलाज किया जा रहा है। स्कूली स्टूडेंट्स के भारी स्कूली बैग का बोझ से उनकी पीठ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

इस समय प्रदेश के मंडी, हमीरपुर और शिमला में सरकारी अस्पतालों में ही फिजियोथेरेपी सुविधा है, जबकि धर्मशाला, हमीरपुर और शिमला में पुनर्वास केंद्रों में भी सुविधा है। हमीरपुर रीजनल अस्पताल के फिजियो विभाग के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो पोस्चरल बैक पांच नए मरीज और जो स्टूडेंट हैं।

बच्चों का ग्राफ बढ़ा : सीएमओ एवं ऑर्थो विशेषज्ञ डॉ. डीएस चंदेल का कहना है कि गलत तरीके से लगातार बैठना और भारी बोझ उठाने से पोस्चरल बैक एक की समस्या हो जाती है। ऐसे बच्चों का ग्राफ बढ़ रहा है। बुजुर्गो को भी घुटनों की दर्द के काफी मरीज फिजियोथेरेपी के लिए आ रहे हैं।

बीमारी के कारण

बच्चों की हड्डियों का विकास हो रहा होता है। ऐसे मंे पीठ पर भारी बोझ के कारण उन पर इसका विपरीत असर होता है। बच्चे पढ़ाई करते समय झुक जाते हैं। पीठ के लोअर हिस्से में दर्द शुरू हो जाती है। पीठ पर ज्यादा बोझ उठाने से बच्चे, पढ़ाई करते समय, कंप्यूटर पर कार्य करते समय कमर को सीधा करके बैठे। ऑर्थो विशेषज्ञ की सलाह पर उपचार के साथ फिजियोथ्रेरेपी भी ली जा सकती है(अश्वनी वालिया,दैनिक भास्कर,हमीरपुर,10.8.2010)।

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