रुपए के दम पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (एनआईएम) से घंटे भर में एमबीए का सर्टिफिकेट जारी होता था। इंस्टीट्यूटट की इंदौर ब्रांच में काम कर छोड़ चुके एक कर्मचारी ने यह खुलासा किया। फर्जीवाड़े को देखकर उसने डेढ़ महीने में ही काम छोड़ दिया। इधर, संस्थान के झांसे में आए युवा भी खुलकर सामने आने लगे हैं।
दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन के बाद एनआईएम द्वारा युवाओं से की गई धोखाधड़ी सामने आने लगी है। इंदौर ब्रांच में काम कर चुके एक कर्मचारी ने दैनिक भास्कर को बताया कि ‘रुपए दो और डिग्री लो’ का खेल संस्थान में खुलेआम चल रहा था। यहां 50 हजार रुपए देने पर -घंटेभर में ही एमबीए की डिग्री जारी कर दी जाती थी। महीने में करीब 50 से अधिक ऐसी फर्जी डिग्रियां जारी की जाती थीं।
इधर, संस्थान से धोखा खा चुके युवा खुलकर सामने आ रहे हैं। कुछ तो थाने में एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में हैं। भास्कर संवाददाता को ऐसे करीब दर्जनभर युवाओं ने फोन किया, जिनसे रुपए तो लिए गए, लेकिन डिग्री नहीं दी गई। बिलासपुर के सचिन जैन ने बताया कि उसने व उसके अन्य साथियों ने 2 साल पहले इंदौर की एनआईएम ब्रांच में प्रवेश लिया था।
यहां उनसे शुरुआत में 17 हजार रुपए जमा कराए गए। इसके बाद उसे पेपर ई-मेल के जरिए भेजने की बात कही गई। फिर उसे पुन: फोन कर संस्थान बुलाया गया। इस बार उसे परीक्षा के लिए आंसरशीट उपलब्ध कराने का विकल्प दिया गया और 2 हजार रुपए मांगे गए।
आंसरशीट उपलब्ध होने के कारण उसने 2 हजार रुपए दे दिए। इसके बाद न तो उसकी परीक्षा ली गई और न ही डिग्री दी गई। डिग्री के लिए वह अभी तक संस्थान के चक्कर लगा रहा है। अंबिकापुर के समीर गुप्ता ने बताया कि उसे एनआईएम से एमबीए करने के लिए कई बार फोन आया। पेपर घर पर ही लिखने और परीक्षा के प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराने की बात भी कही गई।
इसके बाद भी जब समीर ने प्रवेश नहीं लिया तो बिना परीक्षा दिए ही डिग्री मिलने का लालच देते हुए प्रवेश लेने के लिए कहा गया। समीर ने भी संस्थान में प्रवेश लेने के लिए सोच लिया था कि दैनिक भास्कर ने इंस्टीट्यूटट का फर्जीवाड़ा उजागर कर दिया।
2000 हजार से ज्यादा डिग्री जारी.एनआईएम के बिलासपुर शाखा से ही फर्जी तरीके से 2 हजार से ज्यादा सर्टिफिकेट जारी किया गया है। एक सर्टिफिकेट के 35 हजार के हिसाब से केवल बिलासपुर शाखा से ही लोगों को चुना लगाकर 7 करोड़ से ज्यादा रुपए कमाया गया। यह भी जानकारी मिली है कि लोग इस फर्जी डिग्री के सहारे जिले के ही नहीं बल्कि कई बड़ी कंपनियों में कार्यरत हैं।
कोरबा के सैकड़ों ठगी के शिकार.एनआईएम बिलासपुर शाखा के ही कर्मचारियों द्वारा कोरबा में हर महीने दो महीने में काउंसिलिंग आयोजित की जाती थी। इसमें कोरबा के विभिन्न कंपनियों में काम करने वाले सैकड़ों लोग झांसे में आकर एनआईएम में प्रवेश लिया है। कोरबा के आरके सिंह ने बताया कि उसने व उसके करीब 20 साथियों ने 20 से 30 हजार देकर संस्थान में प्रवेश लिया है(दैनिक भास्कर,बिलासपुर,9.8.2010)।
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