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03 अगस्त 2010

उत्तराखंड में बदलेगा नौकरियों में आरक्षण का रोस्टर

उत्तराखंड में लागू आरक्षण की रोस्टर प्रणाली नियमों के अनुकूल नहीं है। इसे नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती भी दी जा चुकी है। हालात के मद्देनजर सरकार इसमें बदलाव पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि अब आरक्षण पहली की बजाय छठी पोस्ट से शुरू होगा। इस बारे में तैयार हो रहे प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी को लाया जा सकता है। सरकारी नौकरियों में सलेक्शन और प्रमोशन के लिए लागू आरक्षण के मौजूदा रोस्टर के तहत पहली सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। अगर केवल एक ही सीट है तो सलेक्शन और प्रमोशन में अनुसूचित जाति को ही पहली सीट मिलेगी। इसके बाद छठी और 11वीं सीट भी अनुसूचित जाति के लिए ही आरक्षित मानी जाएगी। यह रोस्टर प्रणाली केंद्र सरकार के रोस्टर के विपरीत है। केंद्र समेत देश के कई अन्य राज्यों में आरक्षण की शुरुआत छठी पोस्ट से की गई है। एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी पहली सीट के आरक्षण को नियम विरुद्ध करार दिया है। तर्क है कि संविधान के तहत अनुसूचित जाति को 19 फीसदी आरक्षण दिया गया है। ऐसे में आरक्षण की शुरुआत छठी पोस्ट से ही की जानी चाहिए। अगर कहीं एक ही पोस्ट है और इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया जाता है तो इसे शत-प्रतिशत आरक्षण ही माना जाएगा। इसी तरह दो पोस्ट होने की दशा में पहली पोस्ट देने से आरक्षण 50 फीसदी हो रहा है। सूबे में लागू इस रोस्टर को कुछ अफसरों ने नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती है। हाईकोर्ट ने कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर पक्ष रखने को कहा है। हाईकोर्ट में चल रहे इस मुकदमे की वजह से ही आरक्षण की मौजूदा रोस्टर प्रणाली में बदलाव पर मंथन हो रहा है(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,3.8.2010)।

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