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03 अगस्त 2010

देश की डेढ़ लाख से ज्यादा पुस्तकें इंटरनेट पर

माउस के एक क्लिक पर डेढ़ लाख से अधिक पुस्तकों का खजाना खुलने के रोमांच से रूबरू होने का अवसर जल्द आने वाला है। शिमला स्थित भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के पुस्तकालय में उपलब्ध डेढ़ लाख से अधिक पुस्तकों का ए-टू-जेड ऑनलाइन होने जा रहा है। संस्थान ने इसकी प्रक्रिया काफी हद तक पूरी कर ली है। एक माह में यहां मौजूद किताबें व जर्नल ऑनलाइन होने की संभावना है। उसके बाद कोई भी अध्ययन प्रेमी अपनी पसंद की किताब के बारे में जानकारी जुटा सकता है। निर्मल वर्मा, भीष्म साहनी और मुलखराज आनंद जैसे लेखक बेशक इस संसार में नहीं हैं, लेकिन उनके सृजन की आहट शिमला स्थित भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में आज भी सुनी जा सकती है। यहां 1965 में पुस्तकालय की स्थापना की गई। धीरे-धीरे पुस्तकें जुड़ती रहीं और इस समय यह पूरे विश्व में शोध और संदर्भ के नजरिए से समृद्ध पुस्तकालय है। मानविकी और समाज शास्त्र के अलावा वेद, पुराण से लेकर आधुनिक विज्ञान आदि से संबंधित किताबें व जर्नल यहां उपलब्ध हैं और ये सभी ऑनलाइन होने जा रहे हैं। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में अध्येता लगातार अध्ययनरत और शोधरत रहते हैं। उनके लिए शोध और संदर्भ ग्रंथ अत्याधिक महत्वपूर्ण होते हैं। पुस्तकालय को स्टेट ऑफ आर्ट के दर्जे का बनाया गया है। पुस्तकालय में तिब्बत त्रिपिटिका ग्रंथों के अलावा पाली और प्राकृत काव्य की दुर्लभ पुस्तकें उपलब्ध हैं(दैनिक जागरण,शिमला,3.8.2010)।

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