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09 अगस्त 2010

लखनऊ विश्वविद्यालयःनए पाठ्यक्रमों में छात्रों की रुचि नहीं

विवि में नये-नये पाठ्यक्रम और कोर्स आते जा रहे हैं लेकिन युवाओं का रुझान अभी भी परंपरागत पाठ्यक्रमों पर ही है। रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की होड़ के बावजूद फिजिक्स, केमेस्ट्री, बॉटनी व जूलोजी जैसे विषयों की चमक फीकी नहीं पड़ी है। एडमिशन में युवा नए पाठ्यक्रमों के बजाय बेसिक साइंस को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। हालांकि साइंस के दूसरे पाठ्यक्रमों में भी आवेदकों की संख्या बढ़ रही है।
लखनऊ विश्वविद्यालय में पीजी कोर्सों में आवेदन करने वाले ज्यादातर छात्रों ने विज्ञान, कॉमर्स और केमेस्ट्री पर ही फोकस किया है। छात्रों ने सबसे अधिक आवेदन बॉटनी में किया है। दूसरे नंबर पर कमेस्ट्री, तीसरे पर जुलोजी और चौथे स्थान पर फिजिक्स है। इसके बाद से इन विभागों के अंतर्गत संचालित होने वाले अन्य पीजी पाठ्यक्रमों की गिनती शुरू होती है। सेल्फ फाइनेंस कोर्सों में सबसे अधिक डिमांड बॉटनी विभाग से संचालित होने वाले इनवायरमेंटल साइंस की है। विशेषज्ञों का कहना है कि नए पाठ्यक्रम चाहे कितने ही संशोधित व परिवर्तित स्वरूप में आ रहे हों लेकिन विज्ञान के परंपरागत पाठ्यक्रमों का विकल्प नहीं बन पाए हैं। स्पेशलाइज्ड कोर्स उस ब्रांच की बेहतर जानकारी दे सकते हैं, लेकिन फिजिक्स, कमेस्ट्री, बॉटनी, जूलोजी का क्षेत्र काफी व्यापक है। इस विषयों भी अभी भी नौकरी के काफी अवसर हैं , इसलिए इन पर भरोसा कायम है(अमर उजाला,8 अगस्त,2010)।

1 टिप्पणी:

  1. स्थापित तरीकों से डिगने में समय लगता है. जल्द ही रोजगार के अवसर देखते हुए लोगों की रुचि बदलेगी.

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