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10 अगस्त 2010

चंडीगढ़ःएजुसिटी योजना रद्द होने के आसार

मल्टीमीडिया-कम-फिल्मसिटी, थीम-कम-एम्यूजमेंट पार्क के बाद अब चंडीगढ़ प्रशासन ने एजूकेशन सिटी प्रोजेक्ट को भी रद्द करने की तैयारी कर ली है। प्रशासन की दलील है कि इस प्रोजेक्ट के लिए चुने गए शिक्षण संस्थानों में से कई ने एमओयू साइन नहीं किया।

संस्थानों का कहना है कि प्रशासन की शर्ते घाटे का सौदा साबित होंगी। अंदरखाते हकीकत यह है कि कोई भी अफसर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाकर आफत मोल लेने को तैयार नहीं है। उन्हें डर है कि कोई प्रोजेक्ट शुरू करके गृह राज्य लौटने के बाद उनके खिलाफ भी सीबीआई या सीवीसी जांच शुरू हो जाएगी।

एजूकेशन सिटी का भविष्य तय करने के लिए सोमवार को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की मीटिंग बुलाई गई थी। नगर प्रशासक के सलाहकार प्रदीप मेहरा बीमार होने के कारण छुट्टी पर चले गए और मीटिंग रद्द हो गई। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक प्रशासन एजूकेशन सिटी प्रोजेक्ट को रद्द करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

एजूकेशन सिटी के लिए नौ शिक्षण संस्थानों का चयन किया गया था। इनमें से तीन शिक्षण संस्थान चितकारा एजूकेशन ट्रस्ट, नर्सी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एनएमआईएमएस) और रामनाथ गोयनका मेमोरियल ट्रस्ट एंड मीडिया फाउंडेशन लिमिटेड ने ही प्रशासन के साथ एमओयू साइन किया। इन तीनों संस्थानों के प्रबंधक भूमि पूजन कर चुके हैं और प्रशासन को समझौते के तहत लाखांे रुपये भी जमा करा चुके हैं। पूर्व नगर प्रशासक जनरल एसएफ रोड्रिग्स ने नर्सी मोंजी इंस्टीट्यूट का 12 अक्टूबर 2009 और चितकारा का 26 अक्टूबर 2009 को नींव पत्थर रखा था।

छह संस्थानों ने एमओयू साइन नहीं किया। इसकी वजह बताई जा रही है एजूकेशन सिटी में शैक्षणिक संस्थानों को 33 साल के लिए लाइसेंस पर साइट देने की शर्त। ये शैक्षणिक संस्थान 99 साल की लीज पर साइट देने की मांग कर रहे हैं। इन संस्थानों के प्रबंधकों के मुताबिक लाइसेंस पर साइट मिलने से यूजीसी और एआईसीटीई से मान्यता मिलने में दिक्कत आएगी। प्रति एकड़ नौ लाख रुपये फीस, रेवेन्यू का तीन फीसदी हिस्सा प्रशासन को देने की शर्त को भी वे घाटे का सौदा बता रहे हैं।

सारंगपुर में 150 एकड़ में बसनी थी एजूकेशन सिटी

सारंगपुर में 150 एकड़ एरिया में एजूकेशन सिटी बननी थी। फेज 1 में 75 एकड़ एरिया को डेवलप करना था। इस फेज के लिए प्रशासन को 25 शैक्षणिक संस्थानों के आवेदन मिले थे। इनमें से 6 को चुना गया, जिनमें डीएवी मैनेजमेंट सोसायटी, फोर्टिस हेल्थ केयर, श्री विले पारले किलवानी मंडल (एनआईएमएस, मुंबई), टेक महिंद्रा लिमिटेड, हिताभिलाषी फाउंडेशन सोसायटी, माया एकेडमी ऑफ एडवांस्ड सिनेमैटिक्स शामिल थे।

इसके बाद एजूकेशन सिटी के लिए नियम व शर्तें घोषित की गई। फेज -2 में सात साइटों के लिए तीन शैक्षणिक संस्थानों ने आवेदन किया- थापर यूनिवर्सिटी, रामनाथ गोयनका मेमोरियल ट्रस्ट एंड मीडिया फाउंडेशन, चितकारा एजूकेशनल ट्रस्ट। नवंबर, 2008 में दूसरे फेज की बची साइटों और तीसरे फेज के लिए आवेदन मांगे गए लेकिन किसी ने आवेदन नहीं किया।

हम भूमि पूजन के बाद शिक्षण संस्थान के निर्माण से पहले जोनिंग के लिए भी एप्लाई कर चुके हैं। प्रशासन को 7.50 लाख रुपये भी अदा कर चुके हैं। प्रशासन इस प्रोजेक्ट को रद्द करता है तो शहर की छवि धूमिल हो सकती है। भविष्य में कोई बड़ी कंपनी यहां इन्वेस्टमेंट में दिलचस्पी नहीं लेगी। प्रशासन को प्रोजेक्ट रद्द करने से पहले गंभीरता से विचार करना चाहिए।

मधु चितकारा, डायरेक्टर चितकारा एजूकेशनल ट्रस्ट

एजूकेशन सिटी पर विचार के लिए आज मीटिंग बुलाई गई थी। इस मीटिंग को आज रद्द कर दिया गया। इस मसले पर जल्द ही दोबारा मीटिंग बुलाकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले प्रोजेक्ट के हर पहलू पर विचार होगा।

प्रदीप मेहरा, नगर प्रशासक के सलाहकार(संजीव रामपाल,दैनिक भास्कर,चंडीगढ़,10.8.2010)

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