मुख्य समाचारः

सम्पर्कःeduployment@gmail.com

08 अगस्त 2010

शिक्षक प्रशिक्षण संस्थाओं का हाल खस्ता

सरकार ने छह से 14 वर्ष की उम्र के सभी बच्चों के लिये शिक्षा को अनिवार्य तो बना दिया है लेकिन इसके लिये देश में न सिर्फ दस लाख से अधिक शिक्षकों की कमी है बल्कि विभिन्न इलाकों में चल रहे शिक्षक प्रशिक्षक संस्थाओं का भी खस्ता हाल है और कई संस्थाएं तो केवल कागजों पर ही चल रही हैं। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने पिछले दिनों संसद में एक प्रश्न के उत्तर में स्वीकार किया कि देश में छह से 14 वर्ष की उम्र के सभी बच्चों को अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के लिए 10.2 लाख शिक्षकों की कमी है।

कागजों पर चल रही कई संस्थाएं
उधर एनसीटीई ने हाल ही में मानव संसाधान विकास मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी है जिसमें कहा गया है कि मध्यप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में काफी संख्या में ऐसे शिक्षक प्रशिक्षक संस्थाएं पायी गई हैं जिनमें से कई केवल कागजों पर चल रही हैं और काफी संस्थाओं में बुनियादी सुविधाओं का सर्वथा अभाव है। एनसीटीई ने निर्धारित मापदंडों एवं दिशानिर्देशों का उल्लंघन किये जाने की शिकायत के बाद अक्तूबर 2009 से मई 2010 के बीच देश के कई क्षेत्रों में स्थित शिक्षक प्रशिक्षण संस्थाओं का दौरा कर इसकी जांच की थी। एनसीटीई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इन संस्थाओं का दौरा करने के बाद यह पाया गया कि इनमें से 50 प्रतिशत में आधारभूत संरचना का अभाव है। जबकि कई अन्य में बुनियादी सुविधाएं ही मौजूद नहीं थी(अमर उजाला,दिल्ली,8.8.2010)।

2 टिप्‍पणियां:

  1. अफसोस होता है जान सुन कर. आभार बताने का.

    जवाब देंहटाएं
  2. आप सही मायनों में शिक्षा मित्र हैं। एक तो आपकी ऊर्जा बेमिसाल है। दिन भर में न जाने कितनी जानकारियां आप देते हैं।
    उसके अलावा इस विषय जैसे अनेक प्रासंगिक मुद्दे भी उठाते रहते हैं।
    सच हमारी शिक्षा व्यवस्था में इस तरह की उपेक्षा और लापरवाही विनाश का करण ही हैं।

    जवाब देंहटाएं

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।