मुस्लिम संगठनों ने मुसलमानों को सर्वशिक्षित करने के लिए आईसीएसई और सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर एक पृथक ‘मुस्लिम शिक्षा बोर्ड’ बनाने का निर्णय लिया है, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को बेहतर शिक्षा दी जा सके। ‘मुस्लिम शिक्षा बोर्ड’ को मूर्त रुप देने के लिए एक पांच सदस्यीय समिति का गठन कर दिया गया है जो इस विषय में अपने सुदेगी तथा ईद के बाद बाकायदा इसका मसौदा तैयार किया जायेगा।
पर्सनल लॉ बोर्ड से कोई लेना देना नहीं
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने बताया कि हालांकि इस बोर्ड का पर्सनल लॉ बोर्ड से कोई लेना देना नहीं है, यह केवल मुस्लिम लड़के लड़कियों को बेहतर शिक्षा देने के लिए किया गया है। फिरंगी महली ने बताया कि ‘मुस्लिम शिक्षा बोर्ड’ का गठन आईसीएसई और सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर किया जायेगा जिसमें पिछड़े मुस्लिम समाज के उत्थान के लिए विशेष प्रयास किये जायेंगे और पढ़ाई का अच्छा माहौल तैयार किया जायेगा। उत्तर प्रदेश में मदरसों के छात्रों के लिए अंग्रेजी, हिन्दी और कम्प्यूटर शिक्षा पहले ही अनिवार्य की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि इसी सप्ताह दिल्ली में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, मिल्ली काउंसिल, जमात-ए-इस्लामी आदि मुस्लिम संगठनों की ओर से आयोजित एक सम्मेलन में राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों के लिए अलग से एक शिक्षा बोर्ड गठन करने की जरूरत महसूस की गयी।
सलमान खुर्शीद और सिब्बल भी मौजूद थे
मौलाना फिरंगी महली ने कहा कि दिल्ली में हुए इस सम्मेलन में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री सलमान खुर्शीद भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि इस बोर्ड के जरिये कक्षा 12 तक धार्मिक शिक्षा के साथ साथ अन्य सभी आधुनिक विषयों की बेहतर पढ़ाई पर निगरानी रखी जायेगी और मुस्लिम प्रबंधन की ओर से संचालित स्कूलों और मदरसों में यह बोर्ड प्रभावी होगा।
समिति के सदस्य
मुस्लिम शिक्षा बोर्ड के गठन के लिए बनायी गयी समिति में प्रख्यात शिक्षाविद एवं कानून के जानकार ई.ए.ईनामदार, सेंट्रल लॉ यूनिवर्सिटी उड़ीसा के कुलपति फैजान के. मुस्तफा, उ.प्र, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन और पूर्व महाधिवक्ता एस.एम.ए.काजमी, अवकाश प्राप्त न्यायाधीश फखरुद्दीन, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता नियाज ए.फारुक और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य तथा शिक्षाविद कमाल फारुकी को शामिल किया गया है।
ईद के शुभ अवसर पर मसौदा तैयार हो जाएगा
फिरंगी महली ने बताया कि रमजान के बाद ईद के शुभ अवसर पर इस बोर्ड के गठन का पूरा मसौदा तैयार कर लिया जायेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इसका सरकारों से कोई लेना देना नहीं होगा, केवल बोर्ड की मान्यता की ही सरकार से दरकार होगी। उन्होंने कहा कि बोर्ड की पूरी जिम्मेदारी मुस्लिम संगठनों की होगी और इसके तहत चलने वाले सभी मुस्लिम स्कूल और मदरसे इसी के प्रबंधन के अंदर काम करेंगे। मौलाना ने कहा कि इस सम्मेलन में मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल से मांग की गयी कि केन्द्र सरकार द्वारा लाया गया शिक्षा का अधिकार कानून देश में चल रहे मदरसों और मुस्लिम कालेजो पर लागू न हो(अमरउजाला,लखनऊ,8.8.2010)।
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