भारत हैवी इलेक्टि्रकल्स लिमिटेड (भेल) के सुपरवाइजरों को चेन्नई में हुई बैठक में निराशा हाथ लगी है। भेल प्रबंधन ने यह साफ कर दिया है कि भेल के सुपरवाइजरों को ढाई इंक्रीमेंट का लाभ नहीं मिलेगा। सूत्रों की मानें तो केन्द्रीय भारी उद्योग मंत्रालय ने सुपरवाइजरों के ढाई इंक्रीमेंट के प्रस्ताव को एप्रूव नहीं किया है। गौरतलब है कि एस-1, एस-2 और एस-3 श्रेणी के सुपरवाइजरों को पहले ही ढाई इंक्रीमेंट का लाभ मिल चुका है। 1 जनवरी 2007 से 31 दिसम्बर 2009 तक तक जो सुपरवाइजर भर्ती हुए हैंउन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा। बैठक में एस-4 व एस-8 को मोबाइल चार्ज, एस-6, एस-7 के प्रमोशन पीरियड में एक साल की कमी की गई है। बैठक में एक अहम मुद्दे पर और सहमति बनी है एस-4 से ऊपर के सुपरवाइजरों को पीआरपी का भुगतान किया जाएगा। सुपरवाइजरों को लैपटाप देने के मामले में भी प्रबंधन विचार कर रहा है वहीं एस-4 से ऊपर सुपरवाइजरों के लिए नई सीआर पद्धति (ई-मैप) लागू करने पर भी सहमति बनी है। ढाई इंक्रीमेंट दिए जाने के सवाल पर प्रबंधन भारी उद्योग मंत्रालय से चर्चा करने की बात कर रहा है। गौरतलब है कि 1 जनवरी 2007 से 31 दिसम्बर 2009 तक भर्ती हुए वर्करों को ढाई इंक्रीमेंट का फायदा मिल चुका है, लेकिन भेल की रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले इस अवधि में भर्ती हुए सुपरवाइजरों को ढाई इंक्रीमेंट का फायदा न मिलना किसी के गले नहीं उतर रहा है(दैनिक जागरण,भोपाल,8.8.2010)।
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