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08 अगस्त 2010

सिंधी में घटती रूचि चिंता का विषय

मध्यप्रदेश में संतनगर में सिंधी साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित दो दिवसीय सिंधी युवा महोत्सव का शनिवार देर शाम बैरागढ़ के नंदवानी भवन में सिंधी गीतों से शुभारंभ हुआ। इस मौके पर ब्रम्हलीन स्वामी हिरदाराम जी के उत्तराधिकारी संत सिद्ध भाऊ जी ने कहा कि मातृ भाषा के प्रति घटती रुचि चिंता का विषय है। इसके लिए लोगों को सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम आगे भी जारी रहने चाहिए ताकि सिंधी भाषा व संस्कृति का संवर्धन हो सके। अकादमी के प्रभारी निदेशक गणेश बागदरे एवं सिंधी सेन्ट्रल पंचायत के संरक्षक तथा प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी सदस्य प्रकाश मीरचंदानी की विशेष उपस्थिति में आयोजित इस दो दिवसीय सिंधी युवा महोत्सव के पहले दिन इंदौर से आए कमल आहूजा एवं उनकी मण्डली ने सिंधी गीतों से समा बांधा। खासतौर पर उनका स्वामी हिरदाराम जी को समर्पित गीत जिये साई जिये बाबा हिरदाराम साहिब जिये के अलावा सिंधी अबाणी बोली, मिठड़ी अबाणी बोली को श्रोताओं ने काफी सराहा। इस अवसर पर अपने संक्षिप्त उद्बोधन में सिद्ध भाऊ ने कहा कि बैरागढ़ को सिंधी भाषी लोगों की नगरी कहा जाता है, लेकिन यहां कम उपस्थिति इस बात का सूचक है कि मातृ भाषा के प्रति लोगों की रुचि घट रही है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने घर में अपने बच्चों के साथ मातृ भाषा में बातचीत करने का आव्हान किया। साथ ही सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक रहने की भी बात की। समारोह के पहले दिन साहित्यकार स्व. केवी बेगवानी द्वारा लिखित एवं टीवी उद्घोषिका कविता इसरानी द्वारा निर्देशित सिंधी नाटक विरहासत का मंचन किया गया(दैनिक जागरण,संतनगर,8.8.2010)।

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