हाईकोर्ट ने एक मामले में लोक सेवा आयोग (पीएससी) के चेयरमैन को नोटिस जारी कर प्रमोशन में गड़बड़ी को लेकर दायर याचिका पर जवाब देने को कहा है। संयुक्त संचालक अभियोजन सुरेश प्रसाद शर्मा ने अपने प्रमोशन को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिका में कहा गया था कि उनका प्रमोशन अतिरिक्त संचालक अभियोजन (सामान्य वर्ग) के रिक्त पद के लिए किया गया था। इसके लिए 11 फरवरी 2010 को बैठक रखी गई थी।
बैठक के पहले प्रमोशन से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज विभाग और शासन द्वारा प्रस्तुत कर दिए गए थे लेकिन विभागीय प्रमोशन समिति के चेयरमेन जो कि लोग सेवा आयोग के भी चेयरमेन हैं।
द्वारा समिति के एक सदस्य की अनुपस्थिति के आधार पर समिति की बैठक आगे बढ़ा दी। नई तारीख 23 फरवरी 2010 को तय की गई थी। जब 23 तारीख को बैठक तय हुई तो इसे भी एक अभ्यावेदन के आधार पर आगे बढ़ा दिया गया।
याचिकाकर्ता का कहना था कि जिस व्यक्ति के अभ्यावेदन के आधार पर दूसरी बार हुई बैठक आगे बढ़ाई गई, वह प्रमोशन के पात्र ही नहीं था। उस अभ्यावेदन के आधार पर चेयरमेन ने आपत्ति की कि शासन द्वारा अनुभव छूट के संबंध में लोक सेवा आयोग से पूर्व में सहमति पत्र नहीं लिया गया और उस व्यक्ति का नाम प्रमोशन के लिए नहीं भेजा गया।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि 11 फरवरी को रखी गई पहली बैठक में अकेले याचिकाकर्ता का नाम विचारण के लिए रखा गया था और गुण-दोष पर विचार किए बिना ही उसके नाम को प्रमोशन के लिए अमान्य कर दिया गया, जो उसके अधिकारों का हनन है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने आयोग के चेयरमेन सहित अन्य प्रतिवादियों से जवाब-तलब किया है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील कृष्णमोहन शुक्ला, दिनेश तिवारी ने पैरवी की(दैनिक भास्कर,बिलासपुर,9.8.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।