सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन दिए जाने के लिए लड़ी जा रही कानूनी लड़ाई में इस वर्ग को पहली बड़ी सफलता मिली है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने शपथ पत्र के जरिए सोमवार को भरोसा दिया कि वह महिलाओं को स्थायी कमीशन देने पर विचार करेगी। फिलहाल सेना की न्यायिक और शिक्षा की शाखा में ही महिलाओं को स्थायी कमीशन दिया जाएगा और प्रक्रिया दो माह में पूरी कर ली जाएगी। शपथ पत्र के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों की अवमानना संबंधी कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। महिलाओं को सेना में स्थायी कमीशन संबंधी कानूनी लड़ाई करीब सात साल बाद सुप्रीम कोर्ट के जरिए सुखद परिणति तक पहुंचने को है। अब तक उन्हें स्थायी कमीशन देने में आनाकानी कर रही सरकार ने अब इसके लिए हामी भर दी है। हालांकि, महिलाओं को सेना की कॉम्बैट, इंफेट्री और अन्य शाखाओं में स्थायी कमीशन के लिए अब भी इंतजार करना होगा। सेना और वायु सेना की 60 सेवानिवृत्त महिला अधिकारियों ने हाई कोर्ट में याचिका लगाकर उन्हें सेना में पुरुषों के समान स्थायी कमीशन दिए जाने की मांग की थी। इस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने इसी साल 12 मार्च 2010 को सरकार को महिलाओं को स्थायी कमीशन देने का निर्देश दिया था। इस निर्देश का पालन न करने पर रक्षा मंत्रालय और सेना प्रमुख के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद सेना ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। बहरहाल, सोमवार को कोर्ट में दायर शपथ पत्र सरकार ने मान लिया कि शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के तहत काम कर रही महिलाओं को सेना की जज एडवोकेट जनरल (जेएजी) व एजुकेशनल शाखा में स्थायी कमीशन पर विचार किया जाएगा। सॉलीसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने न्यायाधीश जे.एम. पांचाल और ज्ञान सुधा मिश्रा की पीठ के समक्ष सरकार की ओर से वादा दिया कि प्रक्रिया दो माह में पूरी कर ली जाएगी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस वक्त सेना में 1,200, वायुसेना में 750 और नौसेना में 250 महिला अधिकारी हैं(दैनिक जागरण,दिल्ली,2.8.2010)।
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