गुरु गोबिंद सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय में विद्यार्थी पढ़ाई को लेकर काफी टेंशन में रहते हैं। स्टुडेंट्स के इस टेंशन का अहसास विश्वविद्यालय प्रशासन को भी हुआ है। इसी के मद्देनजर विवि प्रशासन ने सात ऐसे तरीके निकाले है, जिससे विद्यार्थियों पर पढ़ाई के बोझ से होने वाला तनाव कम किया जा सके। यह तरीका विवि के डीन स्टूडेंट वेलफेयर ने निकाला है। विवि कैम्पस का मानना है कि पढ़ाई और ज्यादा से ज्यादा अंक लाने का तनाव विद्यार्थियों में हमेशा से देखा गया है। विद्यार्थियों में जहां एक ओर पढ़ाई की टेंशन रहती है, दूसरी ओर उनके अभिभावकों का भी दबाव विद्यार्थियों में रहता है। जिससे विद्यार्थियों में हताशा की स्थिति रहती है और इसक बुरा असर उनकी पढ़ाई में होती है। इस समस्या से विद्यार्थियों को निजात दिलाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने सभी सम्बद्ध संस्थानों को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए है। टेंशन खत्म करने का सबसे पहला तरीका गाइडेंस व काउंसलिंग है, इसके लिए एक सेल गठित की गई है। जिसमें विवि के सर्वश्रेष्ठफैकल्टी सदस्यों को रखा गया है, जो कि मनोविान के क्षेत्र में अनुभव रखते है। इसके काउंसलर मानसिक और भावानात्मक तरीके से विद्यार्थियों के तनाव को खत्म करने का प्रयास करेंगे। संस्थानों को कहा गया है कि 15 दिन में एक बार काउंसलिंग सेशन चलाना होगा, जिसमें विद्यार्थी अपनी समस्याएं रखेंगे। इतना ही नही विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले शिक्षकों और अभिभावकों की भी काउंसलिंग की जाएगी, ताकि जिस ओर से भी तनाव हो रहा है, उसको कम किया जा सके। संस्थानों को कहा गया है कि वे शिक्षकों और स्टुडेंट्स के बीच बेहतर रिश्ते बरकरार रखने का प्रयास करेंगे। सभी संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे एक एकेडमिक व डिसिप्लेनरी सेल भी गठन करेंगे, जहां रैगिंग, धूोपान और गैर अनुशासासित हरकतों को अंकुश लगाएंगे। इसके अलावा नियमित तौर पर पैरेंट्स-टीचर्स मिटिंग और कार्यशालाएं भी आयोजित करने पर भी जोर दिया गया है, जिसमें विद्यार्थियों के मानसिक तनाव को कम किया जा सके। संस्थानों को कहा गया है कि अपने-अपने संस्थानों में छात्राओं के लिए अलग से गर्ल्सरूम बनाया जाए। इसके अतिरिक्त संस्थानों में सलाह पेटिका लगाए जाने को भी आदेश दिया गया। जिसमें कोई भी छात्र अथवा छात्रा अपनी समस्या को इस बॉक्स में डालेगा और संस्थान को इस सलाह गंभीरता से लेना होगा। सभी संस्थानों को कहा गया है कि वे अपने फैकल्टी के लिए 15 दिन में एक बार सेमिनार करवाएंगे, जहां हर शिक्षक अपने विषय पर आधा घंटे का लेक्चर देगा। संस्थानों को इन सभी निर्देशों को अमल में लाते हुए तुरंत इसकी सूचना विवि प्रशासन को देने को कहा गया है(राकेश नाथ,राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,9.8.2010)।
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