सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) से संबंधित जिले के अधिकतर स्कूल प्रबंधकों को बोर्ड स्कीमों की पूरी जानकारी नहीं है या वे स्कीम का लाभ देना नहीं चाहते हैं।
कुछ ऐसा ही हो रहा है सीबीएसई की साल 2005 में शुरू की गई सिंगल गर्ल चाइल्ड के साथ। यह स्कीम अब सिर्फ कागजों में ही सिमटकर रह गई है। केन्द्र सरकार की नोटिफिकेशन से शुरू हुई इस स्कीम के तहत सीबीएसई का उद्देश्य लड़कियों को न पढ़ाने की सोच को बदलना व महिला शिक्षा को प्रोत्साहित करना था। बाकायदा इसका सरकुलर देश भर के स्कूलों में बांटा भी गया।
इसके तहत जिन परिजनों के एक ही बेटी होगी उसे शिक्षा निशुल्क दी जाएगी। इसमें ट्यूशन फीस व अन्य खर्च शामिल थे, जबकि कुछ स्कूल प्रबंधन या सुविधा से जुड़े खर्च जारी करने पर सहमति अभी तक नहीं बन पाई है।
लॉरेंस स्कूल के प्रिंसिपल वीके मेहता बताते हैं कि स्कीम को प्रचारित भी न करने से ज्यादातर लोग इसका लाभ लेने पहुंच ही नहीं रहे हैं। गुरु अमर दास स्कूल के एडमिन इंचार्ज एआर रंधावा बताते हैं कि 2005 में जारी सरकुलर के बाद कोई आदेश या निर्देश जारी नहीं किए गए। फिलहाल वे इस स्कीम को नहीं
चला रहे हैं।
लगा अर्जियों का अंबार
सिंगल गर्ल चाइल्ड से फीस वसूली का मामला सीबीएसई मान्यता प्राप्त स्कूलों के गले की फांस बन गया है। पिछले दिनों एक अभिभावक द्वारा मामले को उपभोक्ता फोरम ले जाने के बाद स्कूलों में फीस माफी की अर्जियों का अंबार लग गया है। उल्लेखनीय है कि दैनिक भास्कर द्वारा मामले को प्रमुखता से प्रकाशित करने से पहले जानकारी के अभाव में लोग इकलौती बेटी की पढ़ाई के लिए फीस दे रहे थे।
नकोदर रोड निवासी बलवंत सिंह ने गुरु अमरदास पब्लिक स्कूल मॉडल टाऊन में इस संबंधी अर्जी दी थी पर स्कूल प्रबंधन ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। मामला जिला उपभोक्ता फोरम में जाने के बाद फोरम ने सीबीएसई के सचिव और स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। बस्ती शेख निवासी परमजीत सिंह ने गुरु अमरदास पब्लिक स्कूल में अर्जी देकर 8वीं में पढ़ने वाली अपनी बेटी की फीस माफ करने का निवेदन किया है।
परमजीत सिंह ने बताया कि नियम की जानकारी न होने के कारण वह आज तक करीब 36 हजार रुपए फीस दे चुके हैं। राजिंदर सिंह ने भी स्कूल में अर्जी देकर कहा है कि उनकी बेटी की फीस माफ की जाए। उन्हें अब तक सीबीएसई के गर्ल चाइल्ड एजुकेशन को प्रमोट करने वाली इस स्कीम की जानकारी नहीं थी परंतु अब वह फीस रिफंड करवाना चाहते हैं(मनीश कुमार,दैनिक भास्कर,जालंधर,10.8.2010)।
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