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10 अगस्त 2010

वैकल्पिक नियुक्ति नियोक्ता के विवेक पर निर्भर नहीं- इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है सेवा में रहते हुए शारीरिक रूप से अक्षम होने पर कर्मचारी को पीडब्ल्यूडी एक्ट 1995 के तहत वैकल्पिक नियुक्ति पाने का वैधानिक अधिकार है। वैधानिक अधिकार को नियोक्ता के पूर्वाग्रह या विवेक पर छोड़ा नहीं जा सकता। न्यायालय ने कहा कि शारीरिक रूप से अक्षम कर्मचारी को वैकल्पिक सेवा में न लेकर बर्खास्त करना अधिनियम की धारा 47 का उल्लंघन है। आदेश न्यायमूर्ति सुनील अम्बवानी तथा न्यायमूर्ति केएन पाण्डेय की खण्डपीठ ने भारत संघ की तरफ से दाखिल याचिका को खारिज करते हुए दिया है। न्यायालय ने कैट के उस फैसले को सही करार दिया है जिसमें कर्मचारी विपक्षी को बर्खास्तगी की तिथि से बकाया वेतन का भुगतान 60 वर्ष की सेवा नियुक्ति आयु तक करने का निर्देश दिया है। विपक्षी कर्मचारी उत्तर मध्य रेलवे कानपुर में पार्शल पोर्टल के पद पर 1986 से 2000 तक काम किया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उसे उप-पार्शल पोर्टर पद पर नियुक्त किया गया। वह मेडिकल में भी फिट पाया गया। 26 जुलाई 2001 को सीएमओ ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा कि कर्मचारी जगदीश नारायण वर्मा घुटने के अर्थराइटिस से पीडि़त हैं। वह पार्शल पोर्टर पद के लिए अनफिट हैं। उन्हें बैठने वाला काम देते हुए वैकल्पिक नियुक्ति दी जाए। विभाग ने यह कहते हुए जगदीश नारायण वर्मा को बर्खास्त कर दिया कि इस विभाग में वैकल्पिक पद खाली नहीं है(दैनिक जागरण,इलाहाबाद,10.8.2010)।

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