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09 अगस्त 2010

डेंटल काउंसिल के फैसले को चुनौती देगा पंजाब विश्वविद्यालय

डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (डीसीआई) द्वारा डॉ. एचएस जज इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंस एंड कॉलेज की मान्यता रद्द करने के फैसले को पीयू प्रशासन चुनौती देगा। पीयू प्रशासन पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सामने अपना पक्ष रखेगा। यदि जरूरी हुआ तो कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।

डेंटल कॉलेज के डायरेक्टर प्रिंसिपल डॉ. के. गाबा का कहना है, ‘टीचरों की नियुक्ति के लिए शुरू की गई प्रक्रिया और हॉस्टल जैसी बुनियादी सुविधाएं जुटाने के लिए कॉलेज की ओर से जवाब दिए जाने के बावजूद डीसीआई ने मान्यता रद्द करने का फैसला लिया है। मौजूदा सेशन शुरू होने से पहले जुलाई में डेटल काउंसिल ने टीचरों की भर्ती और हॉस्टल जैसी बुनियादी सुविधाओं के संबंध में जवाब मांगा था।

मैनेजमेंट ने समय पर जवाब भेज दिया था कि सेशन शुरू होने से पहले ही 9 जुलाई को टीचरों की भर्ती के इंटरव्यू हो चुके हैं। इन नियुक्तियों को सिंडिकेट ने भी मंजूरी दे दी है। यह भी बता दिया गया था कि डेंटल कॉलेज का सेक्टर 25 में ही अपना हॉस्टल शुरू हो चुका है।

इस जवाब के बावजूद डीसीआई ने डेंटल कॉलेज को अस्थाई तौर पर मान्यता देने से मना कर दिया है। यह मसला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सामने रखा जाएगा। डीसीआई के मनमाने रवैये की भी शिकायत की जाएगी। कॉलेज में जरूरत के हिसाब से पूरे टीचर और सुविधाएं हैं। जरूरी हुआ तो काउंसिल के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।’

पहले मिल चुकी है राहत

डेंटल कॉलेज की ही तरह इस साल मार्च में नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजूकेशन ने यूनिवर्सिटी के बीए बीएड कोर्स की मान्यता रद्द कर दी थी। लेकिन पीयू ने कोर्ट में याचिका दायर की। इस याचिका में कोर्ट ने एनसीटीई के निर्देश पर रोक लगाते हुए कहा था कि दोबारा इन्सपेक्शन करें और उसके बाद ही कोई फैसला लें(अधीर रोहाल,दैनिक भास्कर,चंडीगढ़,9.8.2010)।

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