स्कूलों में आमिर खान की चर्चित फिल्म ‘थ्री ईडियट्स’ का फार्मूला लागू करने की तैयारी शुरु हो गई। कक्षा पहली से आठवीं तक परीक्षाएं समाप्त करने के बाद शिक्षा विभाग ऐसा फामरूला तैयार कर रहा है, जिससे बच्चे किताब के कीड़े बनकर न रह जाएं बल्कि कामयाब और जीनियस बनें।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद (एससीईआरटी) के संयुक्त संचालक एनपी कौशिक ने बताया कि विशेषज्ञों की टीम ने इस फामरूले का खाका तैयार कर लिया है। फिलहाल उसके स्वरुप में जरुरत के अनुसार कांट-छांट की जा रही है। विशेषज्ञ यह आंकलन कर रहे हैं कि स्कूलों में पढ़ाई का नया सिस्टम लागू करने की दशा में किस तरह की व्यावहारिक दिक्कतें सामने आ सकती हैं। उन तकनीकी खामियों को रायशुमारी से दूर कर फामरूले के स्वरुप में बदलाव किए जा रहे हैं।
19 से 20 अगस्त तक एससीईआरटी के दफ्तर में कार्यशाला आयोजित की गई है। इसमें शिक्षा संचालनालय और राजीव गांधी शिक्षा मिशन के आला अफसर शामिल होंगे। शिक्षा के नए पैटर्न पर अध्ययन करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है।
कार्यशाला में एससीईआरटी के विशेषज्ञ शिक्षा विभाग के अफसरों और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों के सामने नए फामरूले का ब्यौरा पेश करेंगे। अफसरों का कहना है कि अधिकारियों और सामाजिक संस्थाओं से राय ली जाएगी। उनसे मिलने वाले सुझाव के आधार पर नए फामरूले में बदलाव किए जाएंगे। अफसरों के अनुसार जरुरत पड़ने पर स्कूली बच्चों के पालकों को भी बुलाकर उनकी भी राय ली जा सकती है।
फामरूला तैयार होने में 3 साल लग सकते हैं
अफसरों ने संकेत दिए हैं कि नया फामरूला तैयार होने में तीन साल लग सकते हैं। संयुक्त संचालक श्री कौशिक ने बताया कि स्कूलों में तिमाही, छमाही और साप्ताहिक टेस्ट लिए जाएंगे। उसके अंकों के आधार पर ग्रेडिंग तय होगी। शिक्षा सत्र के अंत में वार्षिक टेस्ट भी होगा। शिक्षा के अधिकार कानून में परीक्षा लेने से मनाही नहीं की गई है। यह निर्देश हैं कि बच्चों को कक्षा आठवीं तक फेल न किया जाए।
कोई बच्च फेल नहीं होगा
शिक्षा विभाग ने चालू शिक्षा सत्र में पहली से आठवीं कक्षा तक फेल-पास का सिस्टम समाप्त कर दिया है। बच्चों को ग्रेड दिए जाएंगे। ग्रेडिंग तय करने के मापदंड क्या होंगे, उसी का फामरूला तय हो रहा है। ऐसा फामरूला तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे बच्चे कामयाबी के पीछे न भागें, बल्कि कामयाब बनें। इस साल की चर्चित फिल्म थ्री ईडियट्स में यही संदेश दिया गया है(मोहम्मद निजाम, दैनिक भास्कर,रायपुर,3.8.2010)।

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