सुप्रीम कोर्ट द्वारा लागू लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों से पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन और छात्र संगठनों को कोई सरोकार नहीं है। स्टूडेंट्स काउंसिल चुनाव की अभी घोषणा भी नहीं हुई है, लेकिन पंजाब यूनिवर्सिटी कैम्पस से लेकर हॉस्टलों को पिंट्रेड पोस्टरों से रंग दिया गया है।
लिंगदोह कमेटी की सिफारिशें और पीयू प्रशासन द्वारा तय की गई गाइडलाइंस यह पोस्टर लगाने की इजाजत नहीं देतीं, पर यूनिवर्सिटी में बेलगाम हो चुके छात्र संगठनों को रोकने का साहस किसी के पास नहीं। पिछले दिनों स्टूडेंट्स काउंसिल चुनाव को लेकर चंडीगढ़ पुलिस के साथ मीटिंग के बाद यूनिवर्सिटी ने बुलेटिन जारी करके बड़े बड़े दावे किए थे। कैम्पस में सरकारी संपत्ति पर पोस्टरबाजी और प्रिंटेड स्टेशनरी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई। ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का दावा किया गया, लेकिन यहां कुछ नहीं बदला।
यूनिवर्सिटी की सड़कों पर हर जगह छात्र संगठनों के पोस्टर लगे हैं। पोस्टर लगाने की मनाही नहीं है, लेकिन प्रिंटेड प्रचार सामग्री लगाने पर पूरी तरह रोक है। पीयू ने ऐसे पोस्टर लगाने वालों पर फौरन कार्रवाई की चेतावनी दी थी, लेकिन अब यूनिवर्सिटी प्रशासन को डेढ़ हफ्ते बाद ही अपने आदेशों की फिक्र नहीं है। यदि बॉयज हॉस्टलों का रुख करें तो हॉस्टल नंबर सात की ओर देखते ही छात्र संगठनों की आचार संहिता के प्रति संवेदनशीलता का अंदाजा हो जाता है। इस हॉस्टल के हर ब्लॉक में छात्र संगठनों के पोस्टर लगे हैं। यह पोस्टर न सिर्फ प्रिंटेड हैं, बल्कि सार्वजनिक सपंत्ति का खुलकर दुरुपयोग किया गया है।
एबीवीपी के दावे की पोल खुली
एबीवीपी ने 7 अगस्त को ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि यूनिवर्सिटी में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को लागू करवाने की पूरी कोशिशें करेंगे। एबीवीपी नेता दिनेश चौहान ने यह दावा किया, लेकिन कैम्पस दूसरे छात्र संगठनों की तरह एबीवीपी के भी पोस्टर लगे हैं।
होगी कार्रवाई
डीएसडब्ल्यू प्रो. नवल किशोर का कहना है कि प्रिंटेड पोस्टर का इस्तेमाल और हॉस्टलों की दीवारों पर पोस्टर लगाने की इजाजत नहीं है। ऐसा किया गया है तो उन छात्र संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी जिन्होंने पिंट्रेड पोस्टरों के साथ डिफेसमेंट एक्ट का उल्लंघन किया है(अधीर रोहाल,दैनिक भास्कर,10.8.2010)।
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