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10 अगस्त 2010

लखनऊ विश्वविद्यालय में पीएचडी अध्यादेश टला

कल लखनऊ विश्वविद्यालय में हुई फैकल्टी बोर्ड की बैठक में पीएचडी को लेकर अध्यादेश पारित नहीं हो सका। कला संकाय के विभागाध्यक्षों और शिक्षकों के एकमत न होने से अध्यादेश जारी होना अगली बैठक तक के लिए टल गया है। सुझावों और संस्तुतियों पर विचार करने के लिए एक तीन सदस्यीय उप समिति का गठन किया गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने पीएचडी के मानकों को और कड़ा कर दिया है। यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों के लिए कुछ नियम अनिवार्य कर दिये हैं। इसमें 30 जुलाई तक पीएचडी में प्रवेश पूरे होने, कोर्स वर्क, समय पर परीक्षा और परीक्षा में न्यूनतम अंक निर्धारित करके उससे कम अंक पाने वाले को पीएचडी न कराना आदि अनिवार्य नियम शामिल किये गए हैं। यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को भी पीएचडी के अध्यादेश में व्यक्तिगत तौर पर बदलाव करने के निर्देश दिये थे। इसी को देखते हुए सोमवार को कला संकाय के हर विभाग के अध्यक्षों और शिक्षकों की बैठक बुलायी गई। बैठक में सहमति जतायी गई कि जेआरएफ पाने वाले विद्यार्थियों को पीएचडी प्रवेश परीक्षा से छूट दी जाएगी जबकि नेट और स्लेट पास विद्यार्थियों को इस दायरे से बाहर रखा गया। पीएचडी प्रवेश परीक्षा का पेपर 2 घण्टे का करने पर सहमति जतायी गई। सेवानिवृत्त शिक्षकों द्वारा पीएचडी कराने या न कराने पर कोई फैसला नहीं हो सका। कई अन्य मुद्दों पर काफी बहस के बाद निर्णय नहीं हुआ(दैनिक जागरण,लखनऊ,10.8.2010)।

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