अल्पसंख्यक आयोग ने एक उर्दू अध्यापक के सेवाकाल मे दृष्टिहीन हो जाने पर उसको नौकरी से निकालने सम्बंधी मुकदमे की सुनवाई के दौरान अपने फैसले में कहा कि नि:शक्तता के आधार पर किसी कर्मचारी को नौकरी से नही निकाला जा सकता है। आयोग ने जिला विद्यालय निरीक्षक को आदेश दिया कि वह इस अध्यापक को उसकी रिटायरमेन्ट की आयु प्राप्त होने तक वेतन और प्रोन्निति आदि के सारे लाभ दे। इस आदेश पर अमल करने के लिए आयोग ने जिला विद्यालय निरीक्षक को एक माह का समय दिया है। याची उबैदुर्रहमान जनता शिक्षा निकेतन ओवारा बस्ती मे उर्दू अध्यापक पद पर कार्यरत थे। सन 1991 मे उबैदुर्रहमान की दोनो आंखो की रोशनी चली गयी। इससे वह पठन-पाठन का कार्य करने मे पूर्ण असमर्थ हो गये विद्यालय प्रबंधन उबैदुर्रहमान से उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर करवाता रहा, लेकिन जब वेतन देने की बात आयी तो उपस्थिति पंजिका मे अंधे होने से पूर्व और बाद मे किये गये हस्ताक्षरो मे मेल न खाने का बहाना बनाते हुए वेतन पर रोक लगा दी। इस सम्बन्ध मे उबैदुर्रहमान ने जिला विद्यालय निरीक्षक से न्याय की गुहार की, लेकिन जब वहां कोई सुनवाई नही हुई तो उन्होने वर्ष 93/94 मे हाईकोर्ट मे याचिका दायर कर दी। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई के उपयुक्त साक्ष्यो के आधार पर इस मामले का निस्तारण करे इसके तहत जिला विद्यालय निरीक्षक को नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारो का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी अधिनियम 1995) के तहत मामले का निस्तारण करना था, लेकिन जिला विद्यालय निरीक्षक ने इस अधिनियम की अनदेखी कर मनमाना निर्णय देते हुए 26 मई, 2003 को उबैदुर्रहमान को रिटायर कर दिया और 1991 से पूर्व में की गयी सेवाओ को आधार मानते हुए पेंशन भी निर्धारित कर दी। इसी बीच 21 जनवरी,2005 को उबैदुर्रहमान का निधन हो गया तो उनकी पत्नी को पारिवारिक पेशन मिलने लगी। 19 फरवरी, 2010 को उबैदुर्रहमान के पुत्र फैजुर्रहमान ने अल्पसंख्यक आयोग मे याचिका दायर कर अपने पिता के साथ हुई नाइंसाफी की शिकायत की थी। आयोग के अध्यक्ष लियाकत अली, उपाध्यक्ष फारूक अहमद और इंसराम अली ने इस मामले की सुनवाई करते हुए फैसला दिया कि सेवा काल के दौरान दृष्टिहीनता से हुई नि:शक्त्तता के कारण किसी कर्मचारी को नौकरी से निकाला जाना न्यायसंगत नही है आयोग ने अपने निर्णय मे जिला विद्यालय निरीक्षक बस्ती को आदेशित किया कि वह उबैदुर्रहमान को उसके रिटायरमेन्ट की तिथि तक मिलने वाले वेतनमान और सेवा लाभो को उसके परिवार को दे। इसके लिए आयोग ने जिला विद्यालय निरीक्षक को एक महीने का समय दिया है(राष्ट्रीय सहारा,लखनऊ,9.8.2010)
उपयोगी जानकारी।
जवाब देंहटाएंthe matter is beyond the jurisdiction of National Minorities Commission, then how NCM has passed such order? Moreover, Minorities Commission only send their views/opinions/advice to Government, they never pass order like Court as they have no such right.
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