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09 अगस्त 2010

ज्वैलरी डिजाइनिंग में करिअर

आभूषणों और रत्नों के प्रति मानवीय आकर्षण सदियों से रहा है। अब तक स्त्रियों को रिझाने के लिए मशहूर आभूषणों का जादू पुरुषों के सिर पर चढ़कर बोलते हुए भी देखा जा सकता है। यह ट्रेंड महज भारत में सीमित नहीं है बल्कि विश्व भर में अब यह प्रचलन दिखाई पड़ने लगा है। यह जानकर शायद आश्चर्य हो कि विश्व में सोने के आभूषणों की सर्वाधिक खपत हमारे देश में है। आंकड़ों की भाषा में बात करें तो विश्व की कुल सोने की मांग की २० प्रतिशत हिस्सेदारी भारत की है। घरेलू बाजार में सोने का कारोबार १० अरब डॉलर को पार कर चुका है और इसमें साल दर साल बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। इतना ही नहीं अमेरिका और जापान के बाद भारत का स्थान है पॉलिशड हीरों की सर्वाधिक खपत करने वाले देश के रूप में।

रत्न विज्ञान और ज्वैलरी डिजाइनिंग का क्षेत्र ऐसे युवाओं के लिए कॅरिअर अवसर प्रदान करता है जो आभूषण की दुनिया में कदम रखना चाहते हैं। जहां एक ओर रत्न विज्ञान के तहत विभिन्न बहुमूल्य पत्थरों, नगीनों और जेम्स की गुणवत्ता का अध्ययन कर परखने की विद्या सिखाई जाती है तो वहीं दूसरी ओर ज्वैलरी डिजाइनिंग की ट्रेंनिंग देकर सोने एंव बहूमूल्य नगीनों के जड़ाऊं आभूषण तैयार करने के लिए विशिष्ट प्रोफेशनल तैयार किए जाते हैं। इस पेशे में सफलता के झंडे गाड़ने के लिए सृजनात्मक, कल्पनाशील और मेहनती होने के लिए मार्के टिंग के लिए उपयुक्त एक्सट्रोवर्ट क्वालिटी का होनी भी जरूरी है। जहां तक ट्रेनिंग की बात है तो १०+२ के बाद इस कोर्स के लिए रास्ते खुल सकते हैं। इनमें सार्टिफिकेट से लेकर मास्टर्स डिग्री स्तर तक के कोर्सेज का सरकारी एवं निजी संस्थानों के अनुसार उल्लेख किया जा सकता है। उदाहरण के लिए अकेले डायमंड पर आधारित कई कोर्सेज हैं जिनमें खास तौर से डिप्लोमा इन डायमांड पॉलिशिंग, सार्टिफिकेट इन ग्रेडिंग कटिंग एंड पॉलिशिंग पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन डायमंड टेक्नोलॉजी का नाम लिया जा सकता है। इसी प्रकार जेमोलॉजी, कलर्ड जेमस्टोन कटिंग, ज्वैलरी डिजायन एंड मशीन कास्ट ज्वैलरी जैसे कोर्सेज हैं। अन्य प्रोफेशन की तरह इसमें भी स्पेशियलाइजेशन की विविधताएं उपलब्ध हैं। इनमें फील्ड जेम ग्राइंडर, जेम पॉलिशर, जेम एसोर्टर, इंग्रेपर, ज्वैलरी सैटर, रिसर्चर और साइंस्टि का जिक्र प्रमुख रूप से किया जा सकता है।

इसमें कोई की पहचान दुनिया भर में है। यही कारण है कि भारतीय ज्वैलरी की मांग देश-विदेश में तेजी से बढ़ती देखी जा सकती है। ज्वैलरी की बढ़ती लोकप्रियता और भारतीय आभूषण निर्माताओं के हुनर को दर्शाने के लिए विभिन्न संगठनों द्वारा समय समय पर इस प्रकार की प्रदशर्नियों का आयोजन किया जाता है। हाल शिल्य निर्यात संवईन परिषद प्रायः ऐसे कार्यक्रमों का देश-विदेश में आयोजन करता है। इनमें आभूषण निर्माताओं से लेकर आयाकरों तक का मेला देखा जा सकता है। देश में निर्यात होने वाले आभूषणों ३६ फीसदी अमेरिका में तथा ३४ फीसदी यूरोपीय देशों में जाता है। रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष में निर्यात में १७ प्रतिशत वृद्धि तथा आगामी वित्त वर्ष में ५० प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। टाटा तथा अन्य बड़े कार्पोरेट घरानों द्वारा इस क्षेत्र में उतरने के बाद ब्रांडेड ज्वैलरी का एक नया ट्रेंड देखने का मिला है। हालांकि अब भी इस कारोबार का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र में है। नकली आभूषण तथा सोने में खोट के अलावा नकली रत्नों से ठगने की बढ़ती प्रवृत्ति से बचने के लिए ब्रांडेड एवं हॉलमार्क ज्वैलरी की ओर आम लोगों का रुझान बढ़ता हुआ देखा जा सकता है। इस विद्या में शिक्षित युवाओं एवं अनुभवी कारीगरों को रोजगार के आकर्षक अवसरों के रूप में मिलने की पूरी संभावना है।

झलकियां

*भारत को विश्व की डायमंड पॉलिसिंग राजधानी होने का गौरव प्राप्त है।

*इस कारोबार को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार द्वारा सेज (स्पेशल एक्सपोर्ट जोन) और जेम्स एंड ज्वैलरी पार्कों की स्थापना की जा रही है।

*आभूषण संख्या के आधार पर विश्व बाजार में भारत की हिस्सेदारी ६० प्रतिशत (कुल मूल्य के आधार पर) ८५ प्रतिशत (वैल्यूम के आधार पर) तथा ९२ प्रतिशत (हिस्सेदारी के आधार पर) देखी जा सकती है।

*विश्व में सर्वाधिक तेजी से बढ़ते आभूषण बाजार के रूप में भारत की गिनती।
(अशोक सिंह,मेट्रो रंग,नई दुनिया,दिल्ली,9.8.2010)

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