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10 अगस्त 2010

पीएमसीएचःनए सत्र की पढाई शुरू।अगले वर्ष से एमडी गैस्ट्रोइंट्रोलाजी की पढ़ाई भी

पीएमसीएच में भले ही पढ़ाई एलोपैथी विधा की होती हो पर नये सत्र की पढ़ाई महर्षि चरक शपथ के साथ ही शुरू होती है। सोमवार को महर्षि चरक शपथ के साथ ही एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों का अध्ययन कार्य शुरू हो गया। प्राचार्य एनपी यादव ने छात्रों को सफलता के गुर बताते हुए कहा कि अनुशासन, कक्षाओं में नियमितता तथा गुरू का सम्मान ही मनुष्य को महान बनाता है। उन्होंने नई-नई भाषा सीखने पर बल देते हुए छात्रों को मातृभाषा न भूलने की नसीहत दी। उन्होंने मेडिकल प्रोफेशन की वर्दी का महत्व व सम्मान का उल्लेख करते लुक का भी विशेष ध्यान रखने की बात कही। डा. राजीव रंजन प्रसाद ने छात्रों को पीएमसीएच के गौरवशाली इतिहास से छात्रों को अवगत कराते हुए कहा कि यह एशिया के छह सबसे पुराने मेडिकल कालेजों में से एक है। यहां पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, महात्मा गांधी की पोती, खान अब्दुल गफ्फार खान जैसे लोग इलाज कराने आये थे। उन्होंने कहा कि संस्थान की गरिमा को पुन:स्थापित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अभियान शुरू किया है। इस दिशा में कालेज पूरा सहयोग कर रहा है। स्वास्थ्य मंत्री नंदकिशोर यादव द्वारा सोमवार को गैस्ट्रोइंट्रोलाजी विभाग के नये भवन के उद्घाटन के साथ ही पीएमसीएच के हार्डवेयर (आधारभूत संरचना) में विकास का एक और पायदान जुड़ गया। इस अवसर पर उन्होंने यूनीसेफ व पीएसएम विभाग के संयुक्त तत्वाधान में मातृ-शिशु मृत्युदर कम करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी शुभारंभ किया। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एमसीआई से स्पेशलाइज्ड कोर्स डीएम गैस्ट्रोइंट्रोलाजी की मान्यता मिल चुकी है और अगले सत्र से इसकी पढ़ाई शुरू हो जायेगी। ऐसे में नये भवन के उद्घाटन से विभाग के पास पर्याप्त जगह रहेगी। उन्होंने प्रदेश में उच्च मातृ-शिशु मृत्युदर पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार अपने स्तर से प्रयास कर रही है। लेकिन इसके लिए पर्याप्त चिकित्सकों की कमी है। यूनीसेफ तथा पीएसएम विभाग द्वारा लोगों को प्रशिक्षित करने की पहल की उन्होंने सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य स्थिति को बेहतर करने में जुटी हुई है। विभागाध्यक्ष गैस्ट्रोइंट्रोलाजी डा. विजय प्रकाश ने कहा कि विभाग का काम तो चल ही रहा था पर नये भवन में सेमिनार हाल, लाइब्रेरी तथा चिकित्सकों के परामर्श रूम के निर्माण से न केवल शोध कार्य शुरू किए जा सकेंगे बल्कि शैक्षिक स्तर में भी सुधार होगा(दैनिक जागरण,पटना,10.8.2010)।

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