हरियाणा में करीब एक लाख 27 हजार परिवारों की धड़कनें फिर थमी हुई है। आमतौर पर 15 अगस्त व 26 जनवरी को मुख्यमंत्री बड़ी घोषणाएं करते हैं, ऐसे में इन परिवारों को बड़ी उम्मीदें हैं। दरअसल, ये वे परिवार हैं जिनका कोई न कोई नुमाइंदा राज्य सरकार में अस्थायी कर्मचारी के तौर पर कार्यरत है और उनको इंतजार है पक्के होने का।
हरियाणा सरकार के अधीन कार्य करने वाले ये अस्थायी कर्मचारी अलग श्रेणियों में हैं। मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोडवेज, समाज कल्याण, पुलिस, लोक संपर्क, कृषि, बिजली एवं श्रम विभाग में ये कर्मी कार्यरत हैं। इनको वैसे तो दिहाड़ीदार, तदर्थ, ठेके पर, डीसी रेट वाले और न जाने क्या नाम से पुकारा जाता है लेकिन ये कार्य स्थाई कर्मचारियों से कम नहीं करते। सरकार व कर्मचारी संगठनों के बीच इनको लेकर कई बार वार्ताएं भी हो चुकी हैं।
बताते हैं कि पूरे सवा लाख तो स्थाई नहीं हो सकते, इतना जरूर है कि इनमें आधे से ज्यादा का भाग्य खुल सकता है। बातचीत में ये कहते हैं कि देखो सरकार सवामणि कब कराएगी यानी खुशी कब मनवाएगी। इन कच्चे कर्मियों में दो सौ रुपए से लेकर 40-50 हजार रुपए तक का वेतन लेने वाले भी शामिल हैं। इतना जरूर है कि जो मोटा वेतन ले रहे हैं,वे सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और जरूरतमंदों में नहीं है।
विडंबना यह भी है कि इन अस्थाई कर्मचारियों को पूरी सुविधाएं भी नहीं मिल पाती, सिर्फ वेतन इनका सहारा है, इसमें भी अनुपस्थिति होने पर वेतन काटने व ओवरटाइम का कोई अतिरिक्त नहीं मिलेगा। यहां तक कि सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली शिक्षा,स्वास्थ्य व अन्य सुविधाएं भी इनको नहीं मिलती। देखना यह है कि इन कर्मियों के लिए यह 15 अगस्त सौगात लेकर आता है या नहीं?
रैली में उठेगा मुद्दा
सर्वकर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव अनिल शर्मा कहते हैं कि इन कर्मचारियों को रेगुलर करना चाहिए। इस बार में मुख्यमंत्री से वार्ताएं भी हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की प्रांतीय रैली में यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया जाएगा। शर्मा ने कहा कि मुख्य सचिव उर्वशी गुलाटी की अध्यक्षता में गठित कमेटी को इनके हित में काम करना चाहिए। यह सवा लाख कर्मचारियों व उनके परिवार से जुड़ा मुद्दा है।
मुख्यमंत्री से क्या है उम्मीद ?
पता चला है कि मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा इस मामले में पूरी रुचि ले रहे हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी की बैठकें भी हो चुकी हैं। चर्चा है कि इनमें नियमानुसार जो पक्के हो सकते हैं कि उनकी फाइल वित्त विभाग तक जा पहुंची है। अब देखना यह है कि इस स्वतंत्रता दिवस पर अस्थाई कर्मियों को सौगात मिलती है या नहीं? पूरे प्रदेश के चर्चित मामलों में शामिल होने के कारण इस मुद्दे पर कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं? इतना पता जरूर लगा है कि मुख्यमंत्री हुड्डा की इस बारे में सोच पूरी तरह से पॉजीटिव है।
हां, इन कच्चे कर्मचारियों के बारे में विचार चल रहा है। इनमें कैटेगिरीवाइज पक्के करने की नीति पर विचार हुआ है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठकें हो चुकी हैं। कुछ फाइल वित्त विभाग ने तैयार की हैं। अब यह मुख्यमंत्री के कार्यक्षेत्र में हैं।
सरकारी प्रवक्ता, हरियाणा सरकार(प्रमोद वशिष्ठ,दैनिक भास्कर,चंडीगढ़,10.8.2010)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।