लंबे समय से विवाद का विषय बने पेंशन मद में यूपी की हां के बाद अब उत्तराखंड और यूपी-दोनों राज्य आगे की प्रक्रिया पर विचार कर रहे हैं। मुख्य सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी राशि क्या यूपी एकमुश्त उत्तराखंड को दे पाएगा। यदि किस्तों में देने पर सहमति बनती है तो किस्तों को तय करने का आधार क्या होगा। सन 2000 में एक साथ गठित हुए तीन राज्यों में से झारखंड और छत्तीसगढ़ के मामले में एक आदेश जारी कर दिया गया था, जिस वजह से वहां इस तरह का कोई विवाद खड़ा नहीं हुआ, जबकि उत्तराखंड के मामले में ऐसा नहीं हो सका। इसलिए दस वर्ष से दोनों राज्यों के बीच पेंशन विवाद हल नहीं हो पाया। दर्जनों बैठकों के बाद अब जाकर दोनों राज्यों के बीच सहमति बन पाई है। बीती 19 अगस्त को दिल्ली में केंद्र सरकार की मध्यस्थता में यूपी पहली बार पेंशन मद में अपनी देनदारी पर हामी भरने को तैयार हुआ। आडिटर जनरल (एजी) के आकलन में 31 मार्च 2009 तक का उत्तराखंड का उत्तर प्रदेश पर 1545 करोड़ रुपये बनता है। इस बैठक में केवल यही सहमति बन पाई। जिसे उत्तराखंड की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन इस बैठक में यह तय नहीं हो पाया कि यूपी यह धनराशि कब और कैसे देगा। अब जब धनराशि के लेन-देन की प्रक्रिया चल रही है, तब यह सवाल उठ रहा है। इतनी बड़ी राशि एकमुश्त दे पाना किसी राज्य के लिए आसान नहीं होगा। उत्तराखंड के वित्त विभाग के अधिकारी इस बात से सहमत हैं(दैनिक जागरण,देहरादून,25.8.2010)।
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