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03 अगस्त 2010

डीयू में बीबीईःदो दर्जन छात्रों के दाखिले रद्द। गणित के रिजल्ट पर कुलपति से गुहार

दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस में बीबीई यानी बैचलर ऑफ इकोनोमिक्स में दाखिले के लिए काउंसलिंग में गड़बड़ी पर छात्रों व अभिभावकों ने सवाल खड़े किए और प्रशासन से गुहार लगाई। धांधली के आरोप से घिरने पर विभाग ने दाखिले की प्रक्रिया बीच में रोक दी और करीब दो दर्जन छात्रों का दाखिला रद्द कर दिया।

विश्वविद्यालय में बीबीई की सोमवार को फाइनल काउंसलिंग थी। बताया जाता है कि पहले और दूसरे राउंड की काउंसलिंग सही चली। बाद में हिसाब किताब में थोड़ी भूल के कारण ऐसे छात्रों को दाखिला दे दिया गया जो पहले दोनों राउंड में अनुपस्थित थे। नियम के मुताबिक विभाग को ऐसा नहीं करना था। अभिभावकों ने इसको लेकर डीन स्टुडेंट वेलफेयर के समक्ष सवाल खड़े किए। डिप्टी डीन प्रो दिनेश वार्ष्णेय ने बताया कि छात्रों व अभिभावकों की इस जायज आपत्ति पर साउथ कैंपस के निदेशक प्रो दिनेश सिंह से बातचीत की गई। प्रशासन ने गड़बड़ी को सही पाते हुए विभाग को इसे ठीक करने का निर्देश दिया। इसके बाद बीबीई के करीब दो दर्जन छात्रों का दाखिला रद्द कर दिया गया। वेबसाइट पर इसकी जानकारी भी दे दी गई। प्रो वार्ष्णेय ने बताया विभाग में जाने अनजाने ऐसी गलती कर दी थी। अब इसे सही कर दिया गया है।

उधर,दिल्ली विश्वविद्यालय में गणित ऑनर्स के रिजल्ट खराब होने पर शिक्षकों व छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रशासन से मिला। उन्होंने प्रशासन से छात्रों के रिजल्ट पर पुनर्विचार करने को कहा और उसे दूर करने की मांग की।

शिक्षक प्रतिनिधि आभादेव हबीव ने बताया कि पिछले साल एमपावर्ड कमेटी द्वारा तैयार किए गया गणित का पाठ्यक्रम छात्रों के लिए खासा नुकसानदायक रहा है। इस वर्ष कॉलेजों में ३५ फीसदी से भी अधिक बच्चे प्रथम वर्ष में फेल हो गए हैं। ऐसे छात्रों की परेशानी को देखते हुए ही कुलपति से उनके रिजल्ट का मॉडरेशन करने को कहा गया है। इसके तहत छात्रों के रिजल्ट को देखकर उसकी कमियों को दूर करने को कहा गया है। जिस पेपर में छात्रों के साथ ज्यादती हुई है उसे शिक्षकों ने ठीक करने को कहा। हबीब ने बताया कि रिजल्ट प्रशासन की वजह से खराब हुआ है। उसने बिना शिक्षकों के विचार विमर्श के एक नया पाठ्यक्रम छात्रों पर थोप दिया। यह पाठ्यक्रम शिक्षकों की समझ से भी परे था। इसलिए इसका नुकसान छात्रों को उठाना पड़ा है। प्रशासन से अगले दो साल तक इस पाठ्यक्रम में सुधार करने की मांग की गई है(नई दुनिया,दिल्ली,3.8.2010)।

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