भारतीय सेना भी इन दिनों अपने जवानों के लिए एक रोजगार गारंटी जुटाने में लगी हुई है। गारंटी की यह कवायद सैनिकों के फौज छोड़ने के बाद रोजगार अवसरों को लेकर है। सेना के बाद की जिंदगी के लिए अपने सैनिकों को तैयार करने में जुटा सेना मुख्यालय इन दिनों माइक्रोसाफ्ट जैसी आईटी कंपनियों के साथ हाथ मिला रहा है। वहीं इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय के साथ मिलकर अपने सैनिकों की तालीम बढ़ाने में भी लगा हुआ है। दरअसल, मुख्यालय की चिंता हर साल रिटायर होने वाले पचास हजार सैनिकों के मौजूदा कैरियर विकल्पों को लेकर है। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के मुताबिक बड़ी संख्या में जवान सेना छोड़ने के बाद निजी सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती हो जाते हैं। वहां उन्हें न तो उचित मेहनताना मिल पाता है और न ही एक सेवानिवृत्त फौजी का सम्मान। सार्वजनिक क्षेत्र में सीमित अवसरों के चलते वे उचित मौके के अभाव में भटकते रहते हैं। इन्हें ही नहीं जूनियर कमीशंड अधिकारियों (जेसीओ) और अस्थाई कमीशन प्राप्त अधिकारियों को भी उचित रोजगार की तलाश में खासी मशक्कत करनी पड़ती है। गौरतलब है कि भारतीय सेना में भर्ती होने वालों में 12वीं से नीचे, 12वीं पास, स्नातक और उससे अधिक शैक्षणिक योग्यता वाले होते हैं। इस सूरत को बदलने की जुगत में सेना मुख्यालय ने हाल ही में सूचना प्रौद्योगिकी की समझ व कुशलता बढ़ाने और अंग्रेजी का स्तर सुधारने के लिए क्षमता कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के विशेषज्ञ प्रशिक्षक 47 चिन्हित सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों पर सैन्यकर्मियों को 110 घंटे का प्रशिक्षण देंगे। डिजिटल साक्षरता और सरल अंग्रेजी संवाद में प्रशिक्षण पूरा करने पर सर्टिफिकेट दिए जाएंगे। प्रशिक्षण का यह कार्यक्रम अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी में भी संचालित होगा। इससे पहले मुख्यालय इंदिरा गांधी राष्ट्र मुक्त विश्वविद्यालय के साथ मिलकर सैन्यकर्मियों को शैक्षणिक सुविधाएं मुहैया कराने का कार्यक्रम शुरू कर चुका है। इसके तहत सैनिकों को विभिन्न विषयों में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री देने की व्यवस्था है(दैनिक जागरण,दिल्ली,25.8.2010)।
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