सीबीएसई छात्रों को शास्त्रीय नृत्य, संगीत आदि के जरिए भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जानने का मौका मिलेगा। जानने व समझने के साथ-साथ हुनरमंद छात्र अपनी प्रतिभा भी दिखा सकेंगे। सीबीएसई अपने महत्वाकांक्षी कार्यक्रम कंटीन्यूस एंड कॉम्प्रीहेंसिव इवेल्यूएशन (सीसीई) को लेकर शुरू से ही सजग रही है। इसी कार्यक्रम के उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए अब सीबीएसई ने स्कूलों को शास्त्रीय नृत्य व संगीत आदि की वर्कशॉप का आयोजन कराकर छात्रों को भारतीय संस्कृति की अमीर विरासत को जानने समझने के लिए अवसर देने की सलाह दी है। गौरतलब है कि सीसीई का उद्देश्य ही छात्र के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास का रहा है। इसीलिए इस सिस्टम में पढ़ाई के साथ ही अन्य गतिविधियों को भी एहमियत दी गई है। खेल, नृत्य, संगीत व डिबेट आदि अन्य गतिविधियों को भी छात्र की परफॉर्मेस में जोड़ा जाएगा। इन्हीं विधाओं के जरिए भारतीय संस्कृति से जुड़ने व इनमें अपने हुनर दिखाने के लिए सीबीएसई ने सभी स्कूलों के प्रमुख को भेजे सर्कुलर में इससे संबंधित वर्कशॉप का आयोजन कराने की सलाह दी है। जारी सर्कुलर में कहा गया है कि छात्रों को शास्त्रीय संगीत, नृत्य, योगा, लोककला, थियेटर, मेडिटेशन आदि से जोड़ने के लिए द सोसायटी ऑफ प्रमोशन ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक एंड कल्चर अमंग यूथ (स्पिक मैके) से संपर्क करके वर्कशॉप या आयोजन कराए जा सकते हैं। आयोजन स्कूल निजी स्तर पर, स्कूलों का ग्रुप या फिर सहोदय स्कूल कॉम्पलेक्स मिलकर आयोजित करा सकते हैं। मेरठ सहोदय स्कूल कॉम्पलेक्स के वाइस प्रेसीडेंट व कालका पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. कर्मेद्र सिंह का कहना है कि इस तरह के कार्यक्रम छात्रों से विकास के लिए ही होते हैं। उन्होंने बताया कि स्कूलों द्वारा निजी स्तर पर भी भारतीय संस्कृति की ओर छात्रों का रूझान व उनकी प्रतिभाओं को निखारने की कोशिश की जाती है(दैनिक जागरण,मेरठ,25.8.2010)।
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