हाईकोर्ट द्वारा रविवार को आयोजित सिविल जज प्रारंभिक परीक्षा के दौरान राजधानी के एक केन्द्र पर परीक्षार्थियों को प्रश्न पत्र के गलत सैट वितरित कर दिए गए। आनन-फानन में सभी परीक्षार्थियों से प्रश्न पत्र और ओएमआर सीट वापस ली गई, इसके चलते परीक्षा १५ मिनट विलंब से शुरू हो पाई।
सिविल जज की प्रारंभिक परीक्षा के लिए मोतीलाल नेहरू विज्ञान महाविद्यालय भी एक केन्द्र बनाया गया था। यहां एक कमरे में परीक्षा शुरू होने के पहले छात्रों को उत्तर अंकित करने के लिए ओएमआर सीट बांट दी गईं। इसके बाद घंटी बजते ही प्रश्न पत्र का वितरण भी किया गया, लेकिन प्रश्न पत्र बांटते ही कमरे के निरीक्षकों के हाथ-पैर फूल गए क्योंकि प्रश्न पत्र जिस अनुक्रम में बांटना चाहिए थे उसमें नहीं बांटे गए थे। गौरतलब है कि प्रश्न पत्र में प्रश्नों का क्रम बदलकर ४ प्रकार के सैट बनाए जाते हैं, जिससे आगे-पीछे बैठने वाले परीक्षार्थी एक-दूसरे की ओएमआर सीट से नकल न कर सकें। निरीक्षकों को जैसे ही गलत अनुक्रम में प्रश्नपत्र बंटने का पता चला तो उन्होंने परीक्षा रोककर तुरंत सभी छात्रों से ओएमआर सीट और प्रश्न पत्र वापस ले लिए। इससे पहले सभी छात्र ओएमआर सीट में रोल नंबर आदि सभी जानकारी भर चुके थे। आनन-फानन में दूसरी ओएमआर सीट निर्धारित अनुक्रम के हिसाब से दी गईं और उसके बाद उसी अनुक्रम में प्रश्न पत्रों का वितरण किया गया, लेकिन इससे परीक्षा करीब १५ मिनट विलंब से शुरू हो सकी। हालांकि छात्रों को १५ मिनट अतिरिक्त समय देकर इसकी भरपाई की गई।
भोपाल में सिविल जज प्रारंभिक परीक्षा में ११ केन्द्रों पर करीब ४ हजार परीक्षार्थी शामिल हुए। परीक्षा में केवल एक प्रश्न पत्र था, जिसमें १०० बहु विकल्पीय प्रश्न पूछे गए। इनमें से ७० विधि से और ३० प्रश्न सामान्य अध्ययन के थे। परीक्षार्थियों ने बताया कि इस वर्ष का प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्न पत्र पिछले साल की अपेक्षा कठिन था। सामान्य अध्ययन तो ठीक आया, लेकिन विषय संबंधी प्रश्न काफी कठिन थे। छात्रों का मानना है कि इससे इस साल चयन के कटऑफ अंक कुछ कम रहेंगे।भोपाल में सिविल जज प्रारंभिक परीक्षा में ११ केन्द्रों पर करीब ४ हजार परीक्षार्थी शामिल हुए। परीक्षा में केवल एक प्रश्न पत्र था, जिसमें १०० बहु विकल्पीय प्रश्न पूछे गए। इनमें से ७० विधि से और ३० प्रश्न सामान्य अध्ययन के थे। परीक्षार्थियों ने बताया कि इस वर्ष का प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्न पत्र पिछले साल की अपेक्षा कठिन था। सामान्य अध्ययन तो ठीक आया, लेकिन विषय संबंधी प्रश्न काफी कठिन थे। छात्रों का मानना है कि इससे इस साल चयन के कटऑफ अंक कुछ कम रहेंगे।
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