उत्तराखंड सरकार के अधीन कार्यरत विकलांग कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले हो गई है। मेहरबान राज्य सरकार ने उनके वाहन भत्ते की दरों में वृद्धि कर दी है। समाज कल्याण विभाग के प्रस्ताव को वित्त विभाग के अनुमोदन बाद राज्यपाल ने स्वीकृति दे दी है। इस आशय का शासनादेश लागू कर सभी विभागाध्यक्षों को 19 अगस्त से बढ़ी हुईं दरें देने के निर्देश दिये गये हैं। यहां यह बता दें कि राज्य सरकार विकलांग कर्मचारियों को तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार की व्यवस्था के तहत प्रतिदिन कार्यालय आने-जाने के लिए वाहन का किराया देती आ रही है। हालांकि राज्य गठन के बाद वाहन भत्ते में वृद्धि की मांग भी जोर पकड़ती गई। इधर कई चरणों में तेल के दामों में वृद्धि से विभिन्न वाहनों का किराया भी बढ़ा लेकिन कर्मचारियों को यूपी के जमाने से लागू भत्ता ही दिया जाता रहा है। पिछले दिनों समाज कल्याण विभाग ने वाहन भत्ता बढ़ाये जाने का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा था। इस पर वित्त विभाग के अनुमोदन के बाद प्रस्ताव को राज्यपाल ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। साथ ही समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव एसके मट्टू ने गत 19 अगस्त को शासनादेश भी जारी कर दिया है। इसके तहत राज्य सरकार के अधीन विकलांग कर्मचारियों को अब बढ़ी हुई दरों का लाभ शासनादेश जारी होने की तिथि से ही मिलेगा। नई व्यवस्था में वर्तमान वेतन 5200-20200 ग्रेड पे 1800 वाले जो कर्मचारी 100 रुपये प्रतिमाह वाहन भत्ता पाते थे उन्हें अब 300 रुपये मिलेंगे। वेतनमान 5200-20200 ग्रेड पे 2400 के कर्मचारियों को अब 200 रुपये के बजाए 400 रुपये तथा वेतनमान 9300-34800 ग्रेड पे 4200 वाले कर्मचारियों को 250 रुपये की जगह 500 रुपये मिलेंगे। विकलांग कर्मचारियों के पुनरीक्षित भत्ता से होने वाले अतिरिक्त व्यय की व्यवस्था संबंधित विभागों को अपने स्तर से करनी होगी। वे अपने वेतन व भत्ता मद में अतिरिक्त धन का प्रावधान करेंगे(दैनिक जागरण,हल्द्वानी,22.8.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।