नयी पीढ़ी को स्वस्थ और चुस्त-दुरूस्त बनाए रखने के लिए छत्तीसगढ में लगभग 60 लाख से अधिक स्कूली बच्चों का नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निर्देश पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने इसके लिए विशेष अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। यह अभियान स्वस्थ पाठशाला योजना के तहत संचालित किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने विभागीय अधिकारियों को स्कूल शिक्षा और आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग से सम्पर्क कर अभियान के लिए कार्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अभियान के तहत स्कूलों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण पूरे शैक्षणिक सत्र में चलता रहेगा।
उल्लेखनीय है कि राज्य की 53 हजार 673 प्राथमिक शालाओं में लगभग 35 लाख बच्चे दर्ज हैं। इनके अलावा 21 हजार 950 पूर्व माध्यमिक शालाओं (मिडिल स्कूलों) में दर्ज बच्चों की संख्या 15 लाख के आस-पास है। प्रदेश के दो हजार 630 हाईस्कूलों में करीब छह लाख बच्चे और तीन हजार 260 हायर सेकेण्डरी स्कूलों में करीब तीन लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर और पैरामेडिकल कर्मचारी इन स्कूलों में जाकर सभी छात्र-छात्राओं की सेहत की जांच करेंगें। स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारियों को इस अभियान के लिए परिपत्र जारी कर दिया गया है।
परिपत्र के अनुसार अभियान के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, बीमारों का उपचार, नि:शुल्क दवाईयों के वितरण के साथ ही उन्हें विटामिन 'ए' की खुराक भी दी जाएगी। बच्चों के स्वास्थ्य का लेखा-जोखा रखने के लिए सभी बच्चों को हेल्थ कार्ड दिए जाएंगे, जिसमें लगातार पांच वर्षों तक बच्चे के स्वास्थ्य का रिकार्ड रखा जाएगा। बच्चों के दूसरे स्कूलों में दाखिला लेने पर स्थानांतरण प्रमाण-पत्र के साथ ही उनके हेल्थ कार्ड का भी स्थानांतरण किया जाएगा। स्वास्थ्य सचिव ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारियों को स्वस्थ पाठशाला योजना के तहत सभी स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान बच्चों को हेल्थ कार्ड दिया जाए और उस कार्ड में बच्चे के स्वास्थ्य से संबंधित प्रविष्टियां अनिवार्य रूप से दर्ज हो।
हेल्थ कार्ड राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन से दिया जा रहा है। इसमें पांच वर्ष तक प्रतिवर्ष स्वास्थ्य परीक्षण की जानकारी अंकित करने का प्रावधान किया गया है। यह सुनिश्चित किया जाए कि स्वास्थ्य परीक्षण के दिवस से कम से कम एक सप्ताह पहले पर्याप्त संख्या में स्वास्थ्य कार्ड संबंधित स्कूलों में पहुंच जाए। चूंकि स्वास्थ्य कार्ड पांच वर्षों के लिए है, इसलिए बच्चा यदि दूसरे स्कूल में जाता है तो स्थानातंरण प्रमाण पत्र के साथ हेल्थ कार्ड भी बच्चे को दिया जाए। सभी बच्चों को आवश्यकतानुसार सामान्य बीमारी का उपचार और दवाईयां उपलब्ध कराई जाए। उन्हें विटामिन 'ए' की खुराक और एल्बेंडाजॉल टेबलेट भी आवश्यकतानुसार दिया जाए। इसके साथ ही प्रत्येक स्कूल के पेयजल स्त्रोतों का भी शुध्दिकरण किया जाए। प्रत्येक स्कूल के एक शिक्षक को 'स्वास्थ्य मित्र' के रूप में चिन्हाकित किया जाए। स्वास्थ्य मित्रों के प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की जाए। यह ध्यान रखा जाए कि चालू वित्तीय वर्ष में सभी स्कूलों के सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य रूप से हो जाए। स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों का स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार भी सुनिश्चित किया जाए।
परिपत्र में कहा गया है कि जिला शिक्षा अधिकारी और आदिवासी विभाग के सहायक आयुक्त से समन्वय स्थापित करके ग्रामवार स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कार्यक्रम का निर्धारण किया जाए। शालेय स्वास्थ्य परीक्षण् के लिए किसी ग्राम के लिए निर्धारित तिथि के दिन संबंधित उपस्वास्थ्य केन्द्र में पुरूष अथवा महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता का उपस्थित रहना अनिवार्य होगा। इसलिए एक उपस्वास्थ्य केन्द्र के अन्तर्गत एक से अधिक गांवों में स्वास्थ्य शिविर नहीं लगाया जाए। इसी तरह मंगलवार और शुक्रवार को टीकाकरण दिवस और शनिवार को सेक्टर की बैठक होने के कारण इन दिवसों में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन नहीं किया जाए। स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कोई अंतिम समय-सीमा नहीं है इसलिए स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों के आयोजन कार्यक्रम उपलब्ध संसाधन और चिकित्सकों की उपलब्धता के आधार पर तैयार किया जाए। इसके साथ ही प्रत्येक ग्राम के स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान बीमार बच्चों के लिए रिफरल केन्द्रों का भी निर्धारण किया जाए(छत्तीसगढ़ न्यूज अपडेट,24.8.2010)।
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