डीयू स्टूडेंट यूनियन ( डूसू ) चुनाव में छात्र संगठन इस बार सीनियर स्टूडेंट्स पर दांव खेलने की तैयारी कर रहे हैं। डूसू चुनाव में फ्रेशर को प्रेजिडेंट का भी चुनाव लड़वाया जाता रहा है , लेकिन इस बार चार में से कम से कम तीन पोस्ट पर सीनियर स्टूडेंट्स को मौका मिलने की पूरी - पूरी संभावना है। छात्र संगठन एबीवीपी तो चारों पोस्ट पर सीनियर्स को मौका देने की बात कह रही है। संगठन के मुताबिक कुछ फ्रेशर्स से भी नॉमिनेशन करवाया जा रहा है ताकि किसी सीनियर का नॉमिनेशन कैंसल हो जाता है तो संगठन के पास विकल्प रहे लेकिन पूरी कोशिश यही है कि सीनियर्स ही चुनाव लड़ें। वहीं , एनएसयूआई की वोटिंग प्रक्रिया में टॉप फोर पॉजिशन पर रहने वालों में सिर्फ एक ही फ्रेशर है। यानी अगर इन चारों कैंडिडेट का नॉमिनेशन ठीक रहा तो एनएसयूआई भी तीन सीनियर्स के साथ मैदान में उतरेगी।
डूसू चुनाव 3 सितंबर को होने हैं और मंगलवार को नॉमिनेशन का लास्ट डे है। अभी तक एबीवीपी ने जिन दस कैंडिडेट का नॉमिनेशन करवाया है , उनमें से अधिकतर सीनियर्स स्टूडेंट्स ही हैं। एबीवीपी के प्रदेश मंत्री आशुतोष श्रीवास्तव का कहना है कि पूरे साल संगठन के लिए काम करने वाले स्टूडेंट्स को ही चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए और इसी सोच के साथ संगठन चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहा है। बहुत जरूरी हुआ तो ही किसी फ्रेशर को मैदान में उतारा जाएगा , नहीं तो चारों पोस्ट सीनियर्स के खाते में ही जाएंगी। दरअसल लिंग्दोह कमिटी की सिफारिशों के मुताबिक , स्टूडेंट अपने करियर में एक बार ही छात्रसंघ का चुनाव लड़ सकता है , फिर चाहे वह हारे या जीते। छात्र संगठनों का मानना है कि फ्रेशर्स पहले संगठन के लिए काम करें और फिर उन्हें चुनाव लड़वाया जाए।
उधर, एनएसयूआई ने अभी तक किसी कैंडिडेट का नॉमिनेशन नहीं करवाया है। सोमवार को एनएसयूआई ने कॉलेज यूनिटों के मेंबर्स और डेलिगेट्स का सम्मेलन बुलवाया और वोटिंग करवाई , जिसमें चार कैंडिडेट का सिलेक्शन हुआ।
पिछले साल डूसू चुनाव से ठीक पहले यूनिवर्सिटी ने कोड ऑफ कंडक्ट उल्लंघन के मामले में एनएसयूआई और एबीवीपी के प्रमुख कैंडिडेट को चुनाव लड़ने से रोक दिया था। यही कारण है कि इस बार यूनिवर्सिटी में पोस्टरबाजी और रैलियों का दौर शुरू नहीं हुआ है जबकि पहले नॉमिनेशन से पहले ही पूरे कैंपस में पोस्टर ही पोस्टर नजर आते थे।
चीफ इलेक्शन ऑफिसर प्रफेसर गुरमीत सिंह का कहना है कि इस बार भी कोड ऑफ कंडक्ट पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाएगा। किसी कैंडिडेट ने नियमों का उल्लंघन किया तो उसका नॉमिनेशन कैंसल कर दिया जाएगा। खास बात यह है कि छात्र संगठन भी डरे हुए हैं। छात्र संगठन इस बार ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स का नॉमिनेशन करवा रहे हैं ताकि अगर किसी स्टूडेंट्स का नॉमिनेशन कैंसल होता है तो उसके बदले डमी कैंडिडेट चुनाव लड़ सके।
छात्र संगठन एनएसयूआई ने डूसू चुनाव के लिए इस बार वोटिंग के जरिए अपने पैनल का सिलेक्शन किया है। सोमवार को कॉलेज यूनिटों के मेंबर्स और डेलिगेट्स का सम्मेलन हुआ और इसके बाद 412 मेंबर्स ने वोटिंग की। डूसू की चार पोस्ट के लिए जिन कैंडिडेट्स का नाम फाइनल हुआ , उनमें हरीश चौधरी (119 वोट ), एए वर्धन चौधरी (95 वोट ), दीपिका देसवाल (22 वोट ) और अक्षय कुमार (16 वोट ) शामिल हैं। इस बार एनएसयूआई ने एक पोस्ट छात्रा और एक पोस्ट एससी / एसटी कैंडिडेट के लिए रिजर्व की थी।
दिल्ली एनएसयूआई प्रभारी शहनवाज चौधरी के मुताबिक 14 कैंडिडेट चुनाव लड़ना चाहते थे और इनके लिए वोटिंग हुई। उन्होंने कहा कि टॉप फोर पर रहने वाले इन कैंडिडेट का नॉमिनेशन स्वीकार होने पर यही पैनल चुनाव लड़ेगा लेकिन कुछ और कैंडिडेट से भी नॉमिनेशन करवाया जाएगा ताकि अगर कोई समस्या आती है तो संगठन के पास डमी कैंडिडेट मौजूद रहें। इन चार कैंडिडेट के अलावा जो 10 कैंडिडेट चुनाव लड़ना चाहते थे , उनमें भूपिंदर चौधरी को 69, सुमित तंवर को 45, राघव को 18 वोट मिले जबकि नीरज यादव व सुभांशु सिंह को एक भी वोट नहीं मिला।
एनएसयूआई के 5 रायसीना रोड स्थित ऑफिस में दोपहर 12 बजे से सिलेक्शन प्रोसेस शुरू हुआ। सुबह से ही स्टूडेंट्स की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। 14 कैंडिडेट ने पहले भाषण दिया और उसके बाद वोटिंग शुरू हुई। 412 डेलिगेट्स ने वोटिंग में भाग लिया और दो वोट अस्वीकार कर दिए गए। चुने गए पैनल में हरीश चौधरी खालसा कॉलेज में फर्स्ट ईयर स्टूडेंट हैं जबकि एए वर्धन चौधरी रामजस कॉलेज में सेकंड ईयर स्टूडेंट हैं , बाकी दो कैंडिडेट एमए बुद्धिस्ट स्टडीज में पढ़ाई कर रहे हैं(भूपेंद्र,नभाटा,दिल्ली,24.8.2010)।
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