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22 अगस्त 2010

लखनऊ विश्वविद्यालय में अंक बढ़ाने का मामला गरमाया

लखनऊ विश्र्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग में उत्तर पुस्तिकाओं के अंकों में हेरफेर का मामला गरमाता जा रहा है। शनिवार को विभागाध्यक्ष प्रो.जेवी वैशम्पायन ने अपनी सफाई देते हुए प्रो.नरसिंह को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। दूसरी तरफ शिकायतकर्ता प्रो.सिंह ने विभागाध्यक्ष समेत दो अन्य शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाने की बात कही है। अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो.जेवी वैशम्पायन ने व्यवहारिक अर्थशास्त्र विभाग के शिक्षक प्रो.नरसिंह के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि अंकतालिका की डी-कोडिंग के दौरान प्रो.सिंह द्वारा तैयार अंकतालिका में ओवर राइटिंग दिखायी दी। संदेह होने पर उत्तर पुस्तिकाओं की जांच हुई। इसमें कई विद्यार्थियों के चालीस अंक तक बढ़ा दिये गए थे। शिकायत के बाद अधिष्ठाता कला की अध्यक्षता में जांच समिति बनायी गई। परीक्षा परिणाम वास्तविक अंको के आधार पर ही तैयार करवाया गया। उधर कुलपति और राज्यपाल को शिकायती पत्र भेज चुके प्रो.नरसिंह का कहना है कि विवि के कई प्रभावशाली लोग विभागाध्यक्ष को बचाने में लगे हैं। विवि जांच में हैण्डराइटिंग एक्सपर्ट की सहायता लेने की बात कह रहा है जबकि इससे पहले प्राथमिकी दर्ज कराना अनिवार्य है। अभी तक किसी के खिलाफ मामला दर्ज नहीं कराया गया है। प्रो.सिंह ने कहा कि वह विभाग के अध्यक्ष और अन्य दो शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायेंगे(दैनिक जागरण,लखनऊ,22.8.2010)।

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