डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं शोधार्थियों को अब नोएडा,उत्तर प्रदेश के शारदा विश्वविद्यालय में कुछ विषयों पर रिसर्च करने की सुविधा मिलेगी। कुलपति प्रो. एनएस गजभिए ने रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के बाहर के एक विवि (शारदा विवि नोएडा) के साथ एक एमओयू साइन किया है।
गौरतलब है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के नियमों के तहत रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए स्कूल की अवधारणा के तहत अलग-अलग डीन बनाए गए हैं। रिसर्च एवं डीन डेवलपमेंट कार्यालय द्वारा रिसर्च संबंधी संसाधन एवं सुविधाएं जुटाए जाने के लिए परियोजना बनाई जा रही है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश से बाहर किसी विवि से एमओयू साइन किया गया है। जानकारी के अनुसार आने वाले दिनों में देश के प्रतिष्ठित शोध संस्थानों से भी इस प्रकार के एमओयू साइन किए जा सकते हैं, जिससे डॉ. गौर विवि के शिक्षकों एवं शोधार्थियों को रिसर्च के मामले में सुविधाएं मिलेंगी। खासकर अत्याधुनिक उपकरण, जो वर्तमान में डॉ. गौर विवि में नहीं हैं। इनका सबसे ज्यादा फायदा फॉर्मेसी एवं रसायन शास्त्र विभाग के शिक्षकों-शोधार्थियों को होगा।
फॉर्मास्युटिकल के क्षेत्र में यहां के शोधार्थियों ने प्रारंभिक स्तर पर कई नई खोज की हैं, लेकिन अपनी प्रारंभिक रिसर्च को आगे जारी रखने के लिए संसाधन नहीं होने के
कारण इन्हें दूसरी फॉर्मास्युटिकल कंपनियों पर निर्भर होना पड़ता है। जिस कारण कई शोधार्थी आगे का शोध नहीं कर पाते हैं।
विदेशी विवि से भी हो सकता है एमओयू
केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय की ओर से 15 जनवरी 2009 को देश में जो नए केंद्रीय विवि खोले गए एवं राज्य विवि से केंद्रीय विवि के रूप में प्रोन्नत किए थे, इसके पीछे एक उद्देश्य क्वालिटी ऑफ एजूकेशन एंड रिसर्च भी था। इसी के तहत इन विश्वविद्यालयों अथवा डॉ. गौर विवि में भी क्वालिटी ऑफ एजुकेशन एंड रिसर्च पर जोर दिया जाना है। लिहाजा शिक्षकों को पहली बार यह सुविधा भी दी गई है कि जब वे विवि प्रशासन की अनुमति से किसी इंस्टीट्यूट या संस्थान में किसी शोध परियोजना पर कार्य करने के लिए जाएंगे तो उन्हें विवि की ओर से आर्थिक मदद भी दी जाएगी। इसी को ध्यान में रखते हुए भविष्य में किसी विदेशी विवि या इंस्टीट्यूट के साथ भी एमओयू साइन किया जा सकता है(दैनिक भास्कर,सागर,9.8.2010)।
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