राजस्थान की बार काउंसिल ने अधिवक्ता कल्याण कोष अधिनियम के नियमों में बदलाव कर दिया है। ऎसे में अब कल्याण कोष के सदस्य अधिवक्ताओं को हारी-बीमारी में बडी सहायता राशि मिलेगी। इसके लिए अधिवक्ता कल्याण कोष के शुल्क में भी वृद्धि की गई है।
काउंसिल की शनिवार को हुई साधारण सभा के बाद अध्यक्ष संदीप मेहता ने पत्रकारों को बताया कि मौजूदा राजस्थान अधिवक्ता कल्याण अधिनियम 1993 में लागू किया गया था। बढती महंगाई को देखते हुए इसमें संशोधन आवश्यक था। ताजा बदलाव के बाद अब बीमारी में अधिवक्ताओं को बार काउंसिल से 20 हजार के बजाय 40 हजार रूपए की आर्थिक मदद दी जाएगी। वहीं, गंभीर बीमारी के मामलों में यह राशि 50 हजार से बढाकर एक लाख रूपए कर दी गई है। उन्होंने किसी वकील की मृत्यु हो जाने पर उसके परिजनों को मिलने वाली एक लाख रूपए की आर्थिक सहायता को भी बढाकर ढाई लाख रूपए करने की घोषणा की।
अंशदान बढाया
मेहता ने बताया कि अधिवक्ता कल्याण कोष्ा की सदस्यता लेने वाले वकीलों को अब आजीवन सदस्यता के लिए 10 हजार रूपए के बजाय 17 हजार 500 रूपए अंशदान देना होगा। इसी तरह वकालतनामों और मीमो आदि पर लगने वाले आरएडब्ल्यूएफ टिकट का मूल्य 10 रूपए से बढाकर 25 रूपए कर दिया गया है। कल्याण कोष की सदस्यता के लिए वर्षवार अंशदान करने वाले वकीलों को भी बढी हुई राशि देनी होगी।
नवीनीकरण का नियम मंजूर
बार काउंसिल ने 'रिन्युअल ऑफ सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस रूल्स' को भी मंजूरी दे दी है। ये रूल्स जनवरी 2011 से लागू होंंगे। इसके तहत राज्य के सभी वकीलों को हर पांच साल में अपनी सनद का नवीनीकरण करवाना होगा। रिन्युअल रूल्स करीब चार साल से अटके हुए थे। बीसीआई अध्यक्ष गोपाल सुब्रमण्यम ने भी इसकी सराहना करते हुए पूरे देश में इसे लागू करने में रूचि दिखाई(राजस्थान पत्रिका,जोधपुर,8.8.2010)।
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