संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं का पैटर्न पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी में लागू किया जाएगा। ओआरएम (ऑप्टिकल मार्क रीडर) के माध्यम से यहां परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसके लिए ओआरएम सिस्टम खरीदने पर सहमति बन गई है।
मशीन की लागत तकरीबन 8 लाख रुपए है। शनिवार को शाम 3.30 बजे कार्यपरिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक के पहले से चर्चा में रहे केमेस्ट्री के रीडर मनीष राय का मामला उठाया गया। श्री राय पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी करने का आरोप है।
बैठक में अंतिम रुप से सदस्यों की सहमति पर यह निर्णय लिया गया कि उनके मामले का निपटारा कोर्ट के फैसले के बाद किया जाएगा। इसके लिए यूनिवर्सिटी पहल करेगी। विवि की परीक्षा में हर साल तकरीबन डेढ़ लाख छात्र परीक्षा देते हैं। नाम, इनरोलमेंट नंबर सहित अन्य गड़बड़ियों के बहुत से मामले हर साल सामने आते हैं। इससे बचने के लिए ओआरएम पर कवायद की जा रही है। यूनिवर्सिटी के अधिकारियों का कहना है कि शुरूआत में परीक्षा मंे इसका उपयोग किया जाएगा।
सफलता मिलने पर परीक्षा परिणाम के लिए भी यही व्यवस्था की जाएगी। 70 महाविद्यालयों को मिली वार्षिक संबद्धता : 20 जुलाई को विद्या परिषद की बैठक में 71 महाविद्यालयों की वार्षिक संबद्धता वृद्धि 2010-11 का अनुमोदन किया गया था।
कार्यपरिषद् ने मैत्री कॉलेज ऑफ डेंटिस्ट्री एंड रिसर्च सेंटर, अंजोरा (दुर्ग) को छोड़कर अन्य 70 महावि.को संबद्धता दे दी। सात कॉलेजों को सशर्त अस्थायी संबद्धता : विद्या परिषद् के अनुमोदन को कार्यपरिषद ने मान्य करते हुए सात कॉलेजों को अस्थायी संबद्धता सशर्त दी है।
शर्तों से संबंधित सूचना पूरी करने के लिए 30 अक्टूबर तक का समय दिया गया है। शर्त पूरी नहीं होने पर आगामी सत्र के लिए संबद्धता अमान्य हो जाएगी। इनमें विवेकानंद कॉलेज मौहदापारा, शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर महाविद्यालय दुर्ग, शासकीय दिग्विजय महा. राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ कॉलेज, शिवा कॉलेज भिलाई, रूंगटा कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी दुर्ग और महाराजा अग्रसेन कॉलेज रायपुर शामिल है।
ये होंगे फायदे
प्रतियोगी परीक्षा में परीक्षार्थियों की संख्या लाखों में होती है। नाम, रोल नंबर में कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए इस सीट (ओआरएम) का इस्तेमाल किया जाता है। इससे आसानी से कम समय में इन परीक्षाओं का परिणाम घोषित कर दिया जाता है।
पं.रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी के कुलसचिव केके चंद्राकर का कहना है कि इस सिस्टम के लागू होने से नाम, इनरोलमेंट नंबर जैसी समस्याएं दूर होंगी। परीक्षा का परिणाम भी समय पर घोषित किया जा सकेगा। काम हाइटेक होने से कर्मचारियों पर दबाव भी कम पड़ेगा। अभी यहां मैनुअली काम किया जाता है। इससे आवेदन फार्म और अंकसूची में बड़ी संख्या में आपत्तियां आती हैं(दैनिक भास्कर,रायपुर,8.8.2010)।
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