आप भले ही जीवन के नब्बे बसंत देख चुके हो या आयु का शतक मार चुके हो, लेकिन सरकार अस्सी साल का ही मानेगी। सरकार ने यह करिश्मा इन दिनों चलाए जा रहे साक्षर भारत कार्यऋम के सर्वे में कर दिखाया है। इन दिनों घर-घर दस्तक देकर जो सर्वे किया जा रहा है, उसमें अस्सी पार की उम्र वाले लोगों की आयु सर्वे शीट में अस्सी साल ही दर्ज की जा रही है। अस्सी से ज्यादा उम्र होने के बावजूद सही उम्र की बजाय अस्सी साल ही दर्ज किया जा रहा है। कमोबेश एक साल से कम आयु के बच्चे की उम्र भी एक साल सर्वे शीट में दर्ज की जा रही है। हो रही है निर्देशों की पालना सर्वे में परिवार के सदस्यों की उम्र दर्ज करने के लिए शीट में कॉलम संख्या 16 निर्घारित है। सरकार के दिशा निर्देशों मे स्पष्ट है कि परिवार के किसी सदस्य की उम्र 80 साल से ऊपर है तो उसकी उम्र 80 साल ही लिखी जाए। सिर्फ बुजुर्गो के लिए ही नहीं, बच्चों के आयु के सिलसिले में भी ऐसे ही निर्देश दिए गए है। बच्चे की आयु एक साल से कम है तो शीट में उसकी आयु एक वर्ष दर्ज करने के निर्देश है(ख़बर एक्सप्रेस,बीकानेर,29 जुलाई,2010)।
एक वर्ष से कम आयु के लिए तो एक वर्ष लिखना समझ में आता है लेकिन नब्बे वर्ष के लिए अस्सी वर्ष लिखना फर्जी ही नहीं गैर कानूनी तथा अमानवीय भी है ,क्या कहें फर्जी सरकार के फर्जी रिकोर्ड...?सब जगह बेबकूफों ने नीति ही ऐसी बनायीं है की भ्रष्टाचार फले फूले ...
जवाब देंहटाएंये तो बेवकूफी भरा निर्देश है
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