एक स्कूल, चार शिक्षक, दो छात्र और खर्च साढ़े दस लाख रुपये सालाना। ये है पौड़ी जिले के कोट ब्लाक स्थित सिल्सू गांव के सरकारी जूनियर हाईस्कूल की तस्वीर। यह स्थिति चार सालों से है। यदि इन दोनों बच्चों को प्रतिष्ठित दून स्कूल में पढ़ाया जाए तो भी सालाना मात्र सात लाख रुपये ही खर्च होंगे। यानी साढ़े तीन लाख की बचत और बच्चों के सुनहरे भविष्य की गारंटी अलग से। पौड़ी जिले के कोट ब्लाक स्थित सिल्सू गांव के जूनियर हाईस्कूल में पिछले चार साल से चार अध्यापक दो बच्चों (तीसरी और चौथी कक्षा) को शिक्षित करने में लगे हैं। गांव के अधिकतर बच्चे शहर या दूसरे स्कूलों में शिक्षा पा रहे हैं। इसी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय रजाखेत में 22 बच्चों पर एक अध्यापक और जूनियर हाईस्कूल गेंड में 15 पर तीन अध्यापक तैनात हैं। ग्राम पंचायत गेंड के प्रधान रोशन बिष्ट का कहना है कि वह कई बार शिक्षा विभाग के अफसरों को स्थिति से अवगत करा चुके हैं। बावजूद इसके हालात जस के तस हैं। कल्जीखाल ब्लॉक में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। प्राथमिक विद्यालय डिकमोलीधार में 34 बच्चों पर एक शिक्षक की तैनाती है। प्राइमरी स्कूल ठंगरधार में 10 बच्चों पर दो अध्यापक तैनात हैं। प्राथमिक विद्यालय दयूंसी में 24 बच्चों पर एक अध्यापक तैनात है। अधिकारी राज्य में शिक्षा व्यवस्था बदहाल होने की बात स्वीकारने को तैयार नहीं हैं। अपर जिला शिक्षा अधिकारी एसपी सेमवाल का कहना है कि यदि ऐसा है तो स्कूल बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, जिन विद्यालयों में अध्यापक कम हैं, वहां शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। सितंबर में होने वाली में इस बाबत फैसले लिए जाएंगे। ऐसा क्यों हुआ इस पर अधिकारी इस पर चुप्पी साध लेते हैं(विनोद पोखरियाल,दैनिक जागरण,पौड़ी गढ़वाल,2.9.2010)।
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