भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने चालू वित्त वर्ष के दौरान अनुसंधान पर 2,300 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। इसका मकसद कृषि क्षेत्र की विकास दर बढ़ाना और खेती को जीवनयापन का बेहतर विकल्प बनाना है। आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एस अयप्पन ने चेन्नई में यह जानकारी दी। वे तमिलनाडु विश्वविद्यालय और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एक समारोह में भाग लेने आए थे। उन्होंने बताया कि अब सभी राज्यों में कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन सुधर रहा है। कई राज्यों में कृषि की विकास दर 2.8 फीसदी के स्तर पर पहुंच रही है। कृषि में चार फीसदी की वार्षिक वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। अनुसंधान कार्यक्रम के तहत जलवायु परिवर्तन की नई चुनौतियों का सामना करने, सार्वजनिक निजी साझेदारी को बढ़ावा देने और कृषि को जीवनयापन का जरिया बनाने के लिए लोगों को जागरूक करने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कृषि को आकर्षक पेशा बनाने के लिए किसानों के शिक्षण-प्रशिक्षण की पहल की गई है। साथ ही इस क्षेत्र में नए प्रयोग करने वालों की पहचान करने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत करने की भी योजना है। बकौल अयप्पन आईसीएआर छात्रों को कृषि क्षेत्र के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाता है। इसमें उन्हें कृषि संबंधित पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। आईसीएआर की हर परियोजना या पहल राज्यों से परामर्श करने के बाद तैयार की गई है। आईसीएआर के अधिकारी ने कहा कि इंटरनेट सुविधा से कृषि विज्ञान केंद्रों और विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं व किसानों के बीच विचारों और सूचनाओं के आदान-प्रदान में सुधार होने की उम्मीद है। आईसीएआर ने हरित क्रांति को आगे ले जाने और अपने शोध एवं विकास के जरिए कृषि क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाई है। आईसीएआर, कृषि मंत्रालय के कृषि शोध एवं शिक्षण विभाग (डीएआरई) के तहत एक स्वायत्त संगठन है(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,22.9.2010)।
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