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22 सितंबर 2010

मनरेगा में नियुक्त होंगे कर्मचारी

सरकार मनरेगा पर अपना शिकंजा कसने की तैयारी में है। अब ग्राम प्रधानों (मुखिया) को मनरेगा के सोशल ऑडिट से अलग रखा जाएगा। इसके तहत काम कराने का दायित्व सीधे सरकारी कर्मचारी व अधिकारी संभालेंगे। इसके लिए पंचायतों में पंचायत विकास अधिकारी समेत चार सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। इनके वेतन का खर्च शुरू में केंद्र सरकार उठाएगी लेकिन आठ साल बाद राज्यों को यह खर्च वहन करना पड़ सकता है। ग्रामीण विकास मंत्री सीपी जोशी ने बताया कि मनरेगा की मजदूरी बढ़ाने पर केंद्रीय रोजगार गारंटी परिषद की बैठक में आम सहमति बनी है। अब इस पर योजना आयोग की सिफारिश मांगी गई है। जोशी के मुताबिक मनरेगा की देखभाल करने के लिए प्रत्येक पंचायत में कम से चार सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। उनके वेतन का खर्च केंद्र सरकार उठाएगी जिसे आठ साल बाद चरणबद्ध तरीके से राज्यों को संभालना होगा। इसके लिए राज्यों को पहल करते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय से आम सहमति पत्र पर दस्तखत करने होंगे। पंचायतों में पंचायत विकास अधिकारी, तकनीकी कर्मचारी, प्रसार और हिसाब-किताब के लिए क्लर्क की नियुक्ति का प्रस्ताव है। ये नियुक्तियां उन्हीं जिलों में होंगी जहां मनरेगा में कम से कम 100 करोड़ रुपये का सालाना काम होता है और गांवों की आबादी कम से कम चार से पांच हजार होगी। इस योजना के कार्यो का दायरा बढ़ाने के साथ श्रमिकों की मजदूरी भी बढ़ाई जाएगी। उन्हें अब सौ रुपये प्रतिदिन से अधिक मजदूरी मिलेगी। केंद्र सरकार ने इस दिशा में तैयारियां शुरू कर दी हैं। जोशी ने कहा कि महंगाई बढ़ने के साथ मजदूरी में वृद्धि करना आवश्यक हो गया है। इसके लिए योजना आयोग के सांख्यिकी विभाग को आधार तैयार करने के लिए कहा गया है(दैनिक जागरण,दिल्ली,22.9.2010)।

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