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02 सितंबर 2010

यूपीःअपाहिज बन नौकरी पाने वाले 53 शिक्षकों पर गाज

चिकित्सीय जांच में विकलांगता साबित न होने पर बेसिक शिक्षा विभाग ने विशिष्ट बीटीसी के जरिये परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापक पद के लिए चुने गए 53 अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया है। प्रमाणपत्रों में जालसाजी करने वाले ऐसे शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का भी निर्देश दिया गया है। ऐसे सभी शिक्षकों को वेतन व मानदेय के रूप में भुगतान की रिकवरी का भी आदेश दिया गया है। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव आईपी शर्मा ने सम्बंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को यह आदेश जारी कर दिया है। विशिष्ट बीटीसी के तहत परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 88,000 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के लिए 2007 व 2008 में चयन प्रक्रिया घोषित हुई थी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को पिछले वर्ष प्रादेशिक बीएड विकलांग संघ की ओर से यह शिकायतें मिली थीं कि विशिष्ट बीटीसी में विकलांग कोटे के जरिये नौकरी हथियाने के लिए कई अभ्यर्थियों ने फर्जी तरीके से विकलांगता प्रमाणपत्र हासिल किये हैं। यह भी शिकायत मिली कि प्रमाणपत्रों में अभ्यर्थियों की विकलांगता को बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाया गया है जबकि वे चयन के लिए निर्धारित 40 प्रतिशत विकलांगता की शर्त को पूरा नहीं करते। फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिये विकलांगता कोटे में चुने गए कई अभ्यर्थी विशिष्ट बीटीसी का प्रशिक्षण पूरा कर नौकरी भी कर रहे थे। एससीईआरटी ने शिकायतों से शासन को अवगत कराया। प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय हुआ था कि ऐसे अभ्यर्थियों की जांच के लिए राज्य स्तर पर एक विशेष मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए। विज्ञान भवन में 26 जुलाई से विशेष मेडिकल बोर्ड ने विकलांग अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों और उनकी विकलांगता की जांच की जा रही है। मेडिकल बोर्ड ने अब तक जिन 309 अभ्यर्थियों की शारीरिक जांच की है, उनमें से 53 की विकलांगता प्रमाणपत्र के मुताबिक प्रमाणित नहीं हो पायी है ऐसे अभ्यर्थियों की सेवाएं समाप्त कर उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने का आदेश दिया गया है(दैनिक जागरण,लखनऊ,2.9.2010)।

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